Bihar Crime News: चाकूबाजी में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत, नाराज लोगों ने सड़क पर उतरकर किया बवाल Bihar Crime News: चाकूबाजी में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत, नाराज लोगों ने सड़क पर उतरकर किया बवाल Supreme Court: अब ‘तारीख पर तारीख’ की प्रथा होगी समाप्त, सुप्रीम कोर्ट में इस दिन से लागू होंगे बड़े बदलाव; जानिए.. Supreme Court: अब ‘तारीख पर तारीख’ की प्रथा होगी समाप्त, सुप्रीम कोर्ट में इस दिन से लागू होंगे बड़े बदलाव; जानिए.. Bihar News: बिहार में गुड़ उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, निवेशकों और किसानों के लिए सुनहरा मौका Bihar News: बिहार में गुड़ उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, निवेशकों और किसानों के लिए सुनहरा मौका Patna Nagar Nigam: पटना नगर निगम के कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, दैनिक मजदूरी में हुई इतनी बढ़ोतरी; इस दिन से लागू होंगी नई दरें Patna Nagar Nigam: पटना नगर निगम के कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, दैनिक मजदूरी में हुई इतनी बढ़ोतरी; इस दिन से लागू होंगी नई दरें Bihar Promotion: बिहार सचिवालय सेवा के 855 अधिकारियों का प्रमोशन, नीतीश सरकार ने जारी की अधिसूचना Bihar Promotion: बिहार सचिवालय सेवा के 855 अधिकारियों का प्रमोशन, नीतीश सरकार ने जारी की अधिसूचना
1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 15 Mar 2025 09:20:53 AM IST
Akanksha Singh - फ़ोटो Google
Success Story : कहते हैं कि मेहनत और लगन के आगे कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। रांची की रहने वाली आकांक्षा सिंह इस कहावत को साकार करने वाली एक जीती-जागती मिसाल हैं। एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी करते हुए हर दिन 7-8 घंटे पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन आकांक्षा ने इसे अपनी ताकत बनाया और यूपीएससी 2023 परीक्षा में 44वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया। उनकी यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानते।
चार बार असफलता, फिर मिली बड़ी कामयाबी
बता दें कि आकांक्षा का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में चार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हर असफलता को एक सबक मानते हुए उन्होंने अपनी कमियों को दूर किया और आखिरी प्रयास में शानदार सफलता हासिल की। रांची के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर तैयारी करना उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
पिता से मिली प्रेरणा
आकांक्षा की इस उपलब्धि के पीछे उनके पिता चंद्र कुमार सिंह की बड़ी भूमिका रही। एक इंटरव्यू में आकांक्षा ने बताया कि उनके पिता, जो झारखंड के कल्याण विभाग में संयुक्त सचिव के पद से रिटायर हुए थे, उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा थे। पिता की मेहनत और समाज सेवा के प्रति समर्पण को देखकर आकांक्षा ने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मॉक टेस्ट्स के जरिए अपनी तैयारी को मजबूत किया और गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ीं।
शैक्षिक सफर: जमशेदपुर से जेएनयू तक
आकांक्षा की पढ़ाई का सफर भी उनकी मेहनत का प्रमाण है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा जमशेदपुर से पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे बढ़ते हुए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से पोस्ट ग्रेजुएशन और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। इस मजबूत शैक्षिक पृष्ठभूमि ने उन्हें यूपीएससी की तैयारी में आत्मविश्वास दिया।
मेहनत का फल: 44वीं रैंक
आकांक्षा की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। नौकरी और पढ़ाई को एक साथ मैनेज करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने इसे संभव कर दिखाया। हर दिन 7-8 घंटे की कठिन मेहनत और आत्मविश्वास ने उन्हें यूपीएससी 2023 में 44वीं रैंक दिलाई। उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
सपनों के लिए लगन जरूरी
आकांक्षा सिंह की जिंदगी से एक बात साफ होती है कि असफलता से डरने की जरूरत नहीं है। अगर मेहनत सच्ची हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि खासकर उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो नौकरी के साथ पढ़ाई करने का सपना देखते हैं। आकांक्षा ने न सिर्फ अपने पिता का सपना पूरा किया, बल्कि देश की सेवा करने का एक नया रास्ता भी चुना।