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GST Rate Cut: GST कटौती से सरकारी राजस्व पर असर? रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई; जान लें पूरी खबर

GST Rate Cut: भारत सरकार ने हाल ही में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर लागू जीएसटी दरों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी। इस संशोधन के तहत कई आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दर घटाकर 0% कर दी गई है।

GST Rate Cut
जीएसटी दरों में बदलाव
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

GST Rate Cut: भारत सरकार ने हाल ही में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर लागू जीएसटी दरों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी। इस संशोधन के तहत कई आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दर घटाकर 0% कर दी गई है, जो पहले 5%, 12% या 18% के दायरे में थी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं की कीमतों में कमी लाना और जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को अधिक किफायती बनाना है।


बता दें कि, पनीर और छेना (प्री-पैकेज्ड और लेबलड), UHT दूध, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती, रोटी, पराठा, कुल्चा और अन्य पारंपरिक ब्रेड जैसी खाद्य वस्तुओं पर पहले 5% जीएसटी लगता था, जिसे अब 0% कर दिया गया है। इससे घरेलू भोजन की लागत में कमी आएगी और ये वस्तुएं अधिक सुलभ होंगी।


स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा सेवाओं पर भी बड़ा बदलाव हुआ है। पहले जहां व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर 18% जीएसटी लगता था, अब इसे पूरी तरह से 0% कर दिया गया है। इसी तरह कुछ जीवन रक्षक दवाओं पर 5% से 0%, मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन पर 12% से 0%, और शार्पनर, क्रेयॉन और पेस्टल पर भी 12% से 0% कर दिया गया है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में मदद मिलेगी।


शिक्षा सेवाओं और वस्तुओं पर भी जीएसटी दर में सुधार हुआ है। पहले जहां शिक्षा सेवाओं पर कोई जीएसटी नहीं था, अब 12% लगाया गया है, जबकि शिक्षा से संबंधित कुछ अन्य वस्तुओं पर जीएसटी 18% से घटाकर 0% कर दिया गया है। कॉपी, नोटबुक, पेंसिल, इरेजर जैसी स्कूली जरूरत की वस्तुओं पर भी पहले 12% जीएसटी थी, लेकिन नई व्यवस्था में ये वस्तुएं अब 0% कर के दायरे में आ गई हैं। इसके अलावा कांच की चूड़ियों पर भी जीएसटी की दर 12% से 0% की गई है।


वहीं, केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी रिफॉर्म और नए टैक्स स्लैब में बदलाव के बाद राज्य सरकारों ने राजस्व में कमी की चिंता जताई थी, लेकिन रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, इन बदलावों से सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्पावधि में करीब 48,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है, लेकिन कुल जीएसटी कलेक्शन पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।


जीएसटी काउंसिल ने टैक्स स्लैब को 5% और 18% में समेकित कर तर्कसंगत बनाया है, जो 22 सितंबर 2025 से लागू होगा। इससे कई उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में कमी आएगी और औपचारिक कर दायरे में वृद्धि होगी, जिससे मध्यम अवधि में टैक्स कलेक्शन मजबूत होगा।


रिपोर्ट के अनुसार, 12% स्लैब में कटौती से राजस्व पर खास असर नहीं होगा, जबकि मोबाइल और अन्य तेजी से बढ़ती सेवाओं पर दरें पहले जैसी ही बनी रहेंगी। इस रिफॉर्म से उपभोक्ताओं की आय बढ़ने और मांग में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे जीएसटी संग्रह को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, लाभ उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचेगा, यह उत्पादकों के निर्णय पर निर्भर करेगा।


इन परिवर्तनों का उद्देश्य महंगाई को कम करना और आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं को आम जनता के लिए और भी किफायती बनाना है। सरकार का यह कदम घरेलू बजट पर सकारात्मक प्रभाव डालने के साथ-साथ उपभोक्ता बाजार को भी प्रोत्साहित करेगा। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नई दरों के अनुसार अपने खरीदारी निर्णय लें और सरकारी वेबसाइट या अधिकृत स्रोतों से अपडेट जानकारी लेते रहें।

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