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15-Nov-2025 02:16 PM
By First Bihar
Life Style: किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो 24 घंटे बिना रुके काम करती है। यह रक्त को फिल्टर करती है, अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालती है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखती है। जब किडनी क्षतिग्रस्त हो जाती है और सही तरीके से काम नहीं करती है, तो शरीर में टॉक्सिन और अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। किडनी की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरण में इसका पता लगाकर इलाज किया जाए तो गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। उच्च रक्तचाप और डायबिटीज इसके प्रमुख कारण हैं, लेकिन ऑबेसिटी, धूम्रपान, अधिक नमक का सेवन और अधिक दवाओं का लगातार सेवन भी किडनी पर असर डाल सकता है।
किडनी की बीमारी के संकेत त्वचा पर भी दिखाई देते हैं। रूखी और खुजलीदार त्वचा इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। जब किडनी वेस्ट और एक्स्ट्रा लिक्विड्स को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में टॉक्सिन जमा हो जाते हैं और खनिजों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे स्किन में रूखापन और खुजली होने लगती है। इसके अलावा शरीर में तरल पदार्थ जमा होने से चेहरे, पैरों, टखनों और हाथों में सूजन भी देखी जा सकती है।
किडनी की खराबी एनीमिया का कारण बन सकती है, जिससे त्वचा का रंग पीला पड़ सकता है। शरीर में टॉक्सिन के जमा होने से आंखों और त्वचा में पीलापन भी दिखाई दे सकता है। त्वचा पर खुजली और जलन के कारण घाव, चकत्ते और लाल धब्बे भी बन सकते हैं। इसके अलावा किडनी की समस्या से पेशाब में बदलाव, झाग या खून का आना, बार-बार पेशाब आना, भूख न लगना और थकान जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि समय पर जांच और इलाज शुरू कर दिया जाए तो गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है। इसके लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर चेक कराना, पर्याप्त पानी पीना, नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। किडनी की सुरक्षा के लिए पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी महत्वपूर्ण हैं।
समय पर किडनी की समस्या की पहचान करके और जीवनशैली में बदलाव करके आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं और किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों जैसे क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और डायलिसिस की आवश्यकता से बच सकते हैं। स्किन के संकेत, पेशाब में बदलाव और लगातार थकान को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये किडनी की बिगड़ती स्थिति का पहला इशारा हो सकते हैं।