1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 24 Jan 2026 10:30:15 PM IST
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KATIHAR: बिहार का कटिहार जिला अब शांति का टापू नहीं, बल्कि बारूद के ढेर पर बैठा शहर बनता जा रहा है। यहाँ के युवाओं के सिर पर 'सिंघम' बनने का ऐसा भूत सवार है कि बुलेट की रफ़्तार, मूंछों पर ताव और कमर में लोडेड देसी कट्टा ही अब इनका नया 'स्टेटस सिंबल' बन गया है।
ताज़ा मामला कोढ़ा थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर सिमरिया का है, जहाँ हथियारों के प्रदर्शन का खुला खेल सामने आया है। आरोपी मोहम्मद सद्दाम (पिता: तमीजुद्दीन) ने कानून का खौफ ताक पर रखकर दहशत फैलाने की कोशिश की। बीते 18 जनवरी को सद्दाम ने अपने ही गाँव के मोहम्मद दुलाल के घर पर धावा बोला। गाली-गलौज करते हुए उसने न सिर्फ हथियार लहराया, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। गनीमत रही कि स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी, जिससे घबराकर यह 'कागजी शेर' अपनी स्कूटी छोड़कर फरार हो गया। मौके पर पहुंची कोढ़ा पुलिस ने जब गाड़ी की तलाशी ली, तो दो जिंदा कारतूस बरामद हुए, जो इस बात का सबूत हैं कि इरादे कितने खतरनाक थे।
बड़ा सवाल:
यह सिर्फ एक सद्दाम की कहानी नहीं है। अगर कोढ़ा पुलिस इस मामले की तह तक जाकर निष्पक्ष और कड़ी जांच करे, तो मुंगेर से लेकर कटिहार और बंगाल की सीमाओं तक फैले हथियार तस्करी के एक बड़ा सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है। अब देखना यह है कि पुलिस इस 'गन-कल्चर' पर लगाम कसती है या फिर फाइलें धूल चाटती रह जाएंगी?
कटिहार से सोनू चौधरी की रिपोर्ट