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06-Oct-2025 03:54 PM
By First Bihar
Cough Syrup Controversy: हाल ही में भारत के मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। 6 अक्टूबर 2025 तक मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल में कम से कम 16 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि राजस्थान में 4 अन्य मौतें दर्ज की गई हैं। प्रारंभिक जांच में इन मौतों का मुख्य कारण कफ़ सिरप में पाए गए डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol-DEG) को बताया जा रहा है, जो एक जहरीला रसायन है।
डायएथिलीन ग्लाइकॉल एक औद्योगिक सॉल्वेंट है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर एंटीफ्रीज़, ब्रेक फ्लूइड और पेंट उद्योग में किया जाता है। यह इंसानों के लिए अत्यंत खतरनाक है, लेकिन कुछ निर्माता सस्ते होने के कारण इसे दवा में मिला देते हैं। आम तौर पर कफ़ सिरप बनाने में प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल (Propylene Glycol) का उपयोग किया जाता है, जो सुरक्षित सॉल्वेंट है, लेकिन यह महंगा होता है। बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद जब लैब में इस दवा की जांच की गई, तो इसमें DEG की मात्रा लगभग 48.6 प्रतिशत पाई गई।
DEG शरीर में जमा होकर किडनी और लिवर पर गंभीर प्रभाव डालता है। इसके कारण किडनी और लिवर फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों में इसके सेवन के बाद कई गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे उल्टी, दस्त, पेशाब कम आना या बंद हो जाना, सांस लेने में कठिनाई, भ्रम, बेहोशी और अंततः किडनी फेलियर और मौत।
माता-पिता को इस समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों को खांसी-जुकाम होने पर कफ सिरप देने से बचें। इसके बजाय घरेलू और सुरक्षित उपाय अपनाएं, जैसे बच्चे को गर्म तासीर वाली चीजें खिलाना, गर्म दूध देना और भाप लेना। साथ ही, किसी भी दवा का सेवन कराने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए केवल सर्टिफाइड और लाइसेंसधारी दवाओं का ही उपयोग करना चाहिए, और संदिग्ध या बिना लेबल वाली दवाओं से दूर रहना चाहिए।
Cough Syrup Controversy: हाल ही में भारत के मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। 6 अक्टूबर 2025 तक मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल में कम से कम 16 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि राजस्थान में 4 अन्य मौतें दर्ज की गई हैं। प्रारंभिक जांच में इन मौतों का मुख्य कारण कफ़ सिरप में पाए गए डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol-DEG) को बताया जा रहा है, जो एक जहरीला रसायन है।
डायएथिलीन ग्लाइकॉल एक औद्योगिक सॉल्वेंट है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर एंटीफ्रीज़, ब्रेक फ्लूइड और पेंट उद्योग में किया जाता है। यह इंसानों के लिए अत्यंत खतरनाक है, लेकिन कुछ निर्माता सस्ते होने के कारण इसे दवा में मिला देते हैं। आम तौर पर कफ़ सिरप बनाने में प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल (Propylene Glycol) का उपयोग किया जाता है, जो सुरक्षित सॉल्वेंट है, लेकिन यह महंगा होता है। बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद जब लैब में इस दवा की जांच की गई, तो इसमें DEG की मात्रा लगभग 48.6 प्रतिशत पाई गई।
DEG शरीर में जमा होकर किडनी और लिवर पर गंभीर प्रभाव डालता है। इसके कारण किडनी और लिवर फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों में इसके सेवन के बाद कई गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे उल्टी, दस्त, पेशाब कम आना या बंद हो जाना, सांस लेने में कठिनाई, भ्रम, बेहोशी और अंततः किडनी फेलियर और मौत।
माता-पिता को इस समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों को खांसी-जुकाम होने पर कफ सिरप देने से बचें। इसके बजाय घरेलू और सुरक्षित उपाय अपनाएं, जैसे बच्चे को गर्म तासीर वाली चीजें खिलाना, गर्म दूध देना और भाप लेना। साथ ही, किसी भी दवा का सेवन कराने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए केवल सर्टिफाइड और लाइसेंसधारी दवाओं का ही उपयोग करना चाहिए, और संदिग्ध या बिना लेबल वाली दवाओं से दूर रहना चाहिए।