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13-Jul-2025 01:12 PM
By First Bihar
Sawan 2025: सावन मास भगवान शिव की आराधना का प्रमुख समय माना जाता है, जब पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा, व्रत और अभिषेक किए जाते हैं। यह महीना आत्मिक उन्नति का अवसर होता है, जिसमें नियमित साधना से मन की शांति के साथ-साथ आध्यात्मिक विकास भी संभव होता है। सावन के इस पवित्र महीने में कुछ ऐसे सरल लेकिन प्रभावशाली संकल्प लिए जा सकते हैं, जो न केवल आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे, बल्कि भगवान शिव की विशेष कृपा भी प्राप्त होगी।
सबसे पहला और महत्वपूर्ण संकल्प है ब्राह्म मुहूर्त में जागकर साधना। सावन के पहले दिन सूर्योदय से करीब 45 मिनट पहले उठकर दाहिने हाथ में चावल और गंगाजल लेकर आंखें बंद कर शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और संकल्प की शक्ति मजबूत होती है। इसे निरंतरता के साथ निभाना सफलता की कुंजी है।
दूसरा संकल्प है प्राणायाम और योग। रोजाना कम से कम 45 मिनट तक प्राणायाम या हल्के योगासन करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं, ऊर्जा शुद्ध होती है और ध्यान की गहराई बढ़ती है। ब्राह्म मुहूर्त में योगाभ्यास करना अत्यंत लाभकारी माना गया है, क्योंकि इस समय वातावरण शुद्ध और शांत होता है।
तीसरा महत्वपूर्ण अभ्यास है ध्यान। एक शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। माला जपना इस ध्यान को और भी प्रभावशाली बनाता है। इसे आप अपनी सुविधा अनुसार दिन में या सप्ताह में कई भागों में पूरा कर सकते हैं।
चौथा संकल्प है सावन के सोमवार या पूरे महीने का उपवास रखना। उपवास शरीर और मन की शुद्धि का एक सशक्त माध्यम है। अगर आप पहली बार उपवास कर रहे हैं तो फलाहार से शुरुआत करना उत्तम होगा। सावन के सोमवार को व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है। खासतौर पर कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख की कामना से इस व्रत को रखती हैं।
पांचवां और अंतिम महत्वपूर्ण संकल्प है शिवलिंग का अभिषेक करना। यदि आपके घर में शिवलिंग है तो आप घर पर ब्राह्म मुहूर्त में रुद्राभिषेक कर सकते हैं, अन्यथा मंदिर जाकर बेलपत्र, पुष्प और भोग अर्पित करें। शिवलिंग अभिषेक से भगवान शिव की पूजा सम्पन्न होती है और यह आत्मिक शांति के साथ-साथ रोग-रोगण से मुक्ति भी प्रदान करता है।
सावन के सोमवार का विशेष महत्व
सावन मास में पड़ने वाले सोमवार बेहद शुभ माने जाते हैं। इस वर्ष सावन में चार सोमवार हैं, जिनका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। कहा जाता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी होती है और इस दिन किया गया व्रत, जाप और अभिषेक शीघ्र शिवजी को प्रसन्न करता है। इस दिन की महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह इच्छाओं की पूर्ति, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार को व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और विशेषकर विवाह योग्य कन्याओं के लिए यह दिन वर की प्राप्ति में सहायक होता है।
सावन का महीना न केवल धार्मिक क्रियाकलापों का समय है, बल्कि यह आध्यात्मिक अनुशासन और मन-शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप सावन के इन पांच संकल्पों को नियमित रूप से अपनाते हैं, तो यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा और भगवान शिव की कृपा भी बनी रहेगी।