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उपेंद्र कुशवाहा बोले- लाचार हो गये हैं नीतीश कुमार, अब खुद कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं, दूसरे लोगों के कहने पर राजद के साथ गये

31-Jan-2023 01:01 PM

By First Bihar

PATNA: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी मर्जी से पार्टी और सरकार में कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं. वे वही कर रहे हैं जो उनके इर्द गिर्द मंडराने वाले लोग करा रहे हैं. जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने आज ये खुलासा किया. कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार या जेडीयू के अध्यक्ष मेरे बारे में बड़ी बड़ी बातें कह रहे हैं. कहा जा रहा है कि मुझे पार्टी में बहुत सम्मान दिया गया. हकीकत ये है कि मुझे जेडीयू में लाकर झुनझुना और लॉलीपॉप थमा दिया गया था. 


नीतीश अपनी मर्जी से कोई काम नहीं कर पा रहे

उपेंद्र कुशवाहा ने आज प्रेस कांफ्रेंस किया. उन्होंने सबसे बड़ा खुलासा ये किया कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से कोई काम नहीं कर पा रहे हैं. कुशवाहा ने कहा कि कुछ दिनों पहले कुढ़नी उप चुनाव में जब पार्टी के कैंडिडेट की हार हो गयी थी तो नीतीश कुमार ने खुद स्वीकारा था कि दूसरे लोगों के कहने पर उन्होंने टिकट दिया था. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार ये भी बता चुके हैं कि दूसरे लोगों के कहने पर उन्होंने बीजेपी को छोड़ कर राजद का दामन थामा है. इससे पहले जब 2017 में उन्होंने राजद को छोड़ कर बीजेपी का साथ चुना था वह भी दूसरे लोगों के कहने पर ही किया था. 

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जेडीयू की ये स्थिति खतरनाक है. नीतीश कुमार खुद कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं. वे दूसरे लोगों के कहने पर चल रहे हैं. ऐसे में जेडीयू अब समाप्त होने की ओऱ बढ़ रहा है. तभी मैं बार-बार नीतीश जी से अपील कर रहा हूं कि वे खुद फैसला लेना शुरू करें और पार्टी को बचायें.


मुझे झुनझुना थमा दिया

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार और ललन सिंह ये कह रहे हैं कि मुझे पार्टी में बहुत सम्मान दिया गया. वे कहना चाह रहे हैं कि मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष औऱ एमएलसी बना दिया गया. जब मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया तो मुझे लगा था कि मुझे इस पद के मुताबिक काम करने का मौका मिलेगा. बाद में पता चला कि जो पद मुझे दिया गया था वह एक झुनझुना था. जिस दिन मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था उस दिन पार्टी के संविधान में ऐसे किसी पद का प्रावधान नहीं था. बाद में पार्टी में संविधान में संशोधन कर इस पद का प्रावधान किया गया. मुझे संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया लेकिन मुझे बोर्ड के सदस्यों के मनोनयन करने का अधिकार नहीं दिया गया. पार्टी अध्यक्ष ने भी बोर्ड का मेंबर नहीं बनाया गया.

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि संसदीय बोर्ड का अधिकार होता है किसी चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार तय करना होता है. लेकिन पार्टी ने किसी चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में मेरी राय नहीं मांगी. विधानसभा उप चुनाव, विधान परिषद चुनाव, राज्यसभा चुनाव में कभी मुझे पूछा तक नहीं दिया. मैंने अपनी ओर से सुझाव दिया लेकिन मेरे सुझाव पर कभी पार्टी ने ध्यान नहीं दिया. मैंने नीतीश जी और ललन जी को सुझाव दिया. लेकिन उसका कोई नोटिस नहीं लिया गया.


अति पिछड़ों को जेडीयू ने नकार दिया

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष को कहा था कि पार्टी कार्यालय से पार्टी का काम संचालित करने वाले जो लोग हैं उनमें एक अति पिछड़ा वर्ग का कोई व्यक्ति होना चाहिये. मैंने कहा था कि किसी अति पिछड़े को विधान परिषद या राज्यसभा भेज दीजिये. फिर उसे पार्टी की मुख्यधारा में रखिये. इससे अति पिछड़े वर्ग में मैसेज जायेगा कि जेडीयू में हमारी पूछ है. अभी की हालत तो ये है कि अति पिछड़ा वर्ग के एक मंत्री मदन सहनी है लेकिन उनकी स्थिति क्या है वह खुद बता चुके हैं. मुझे दिख रहा था कि अति पिछड़ों का लगाव जेडीयू से घट रहा है. लेकिन जेडीयू ने एक भी अति पिछड़ा को राज्यसभा या विधान परिषद नहीं भेजा. मेरे किसी सुझाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. तभी मैं कह रहा हूं कि संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर मुझे झुनझुना थमा दिया गया.


MLC बनाकर लॉलीपॉप थमाया

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जहां तक एमएलसी बनाने की बात रही तो मैं अपने सिद्धांतों के लिए केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद का पद छोड़ चुका हूं, एमएलसी कौन सी बड़ी चीज है. पार्टी ने मुझे एमएलसी बनाकर कोई नौकरी नहीं दी थी. एमएलसी बनाकर मुझे लॉलीपॉप थमाया गया. नीतीश जी को लगता है अगर मुझ पर अहसान किया है तो दोनों पद वापस ले लें. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.


नीतीश कुमार ने लालू से मांगी थी हिस्सेदारी

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मैं जेडीयू में हिस्सेदारी मांग रहा हूं तो लोग पूछ रहे हैं कि मैं कौन सी हिस्सेदारी मांग रहा हूं. मैं  उन्हें बताना चाहूंगा कि 1994 में नीतीश कुमार ने गांधी मैदान की रैली से जो हिस्सेदारी लालू यादव से मांगी थी, वही हिस्सेदारी आज हम मांग रहे हैं. और हम बिना हिस्सा लिये नहीं जायेंगे. 

कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार कह रहे हैं कि वे मुझसे प्रेम करते हैं. लगता है कि नीतीश कुमार प्रेम की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं. अगर कोई किसी से प्रेम करता है तो उसे अपने पास और साथ रखना चाहता है. लेकिन मुझे कहा जा रहा है कि मैं पार्टी छोड़ कर चला जाऊं. ये कौन सा प्रेम है कि नीतीश जी का, जो कह रहे हैं कि तुम भाग जाओ.


मुझ पर हमले की जांच मुख्य सचिव और डीजीपी करें

उपेंद्र कुशवाहा ने कल आरा में उन पर जो हमला हुआ था, उसमें एसडीओ और एसडीपीओ ने साझा रिपोर्ट जारी किया है. उस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुझ पर कोई हमला हुआ ही नहीं है. कुशवाहा ने वीडियो दिखाया जिसमें कुछ लोग उनके काफिले पर पत्थर फेंका जा रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी इस मामले की जांच करें. मामले की लीपापोती करने की कोशिश की जा ही है.