बिहार में अब सरकारी टेंडरों पर रहेगी EOU की पैनी नजर, 5 सदस्यीय टीम गठित; गड़बड़ी करने वालों का खेल खत्म बिहार में अब सरकारी टेंडरों पर रहेगी EOU की पैनी नजर, 5 सदस्यीय टीम गठित; गड़बड़ी करने वालों का खेल खत्म बिहार में खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त, 449 उर्वरक लाइसेंस रद्द; 115 लोगों के खिलाफ केस दर्ज बिहार में खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त, 449 उर्वरक लाइसेंस रद्द; 115 लोगों के खिलाफ केस दर्ज Bihar News: बालू के खेल में शामिल खनन निरीक्षक गिरफ्तार, DM को भी कर रहा था गुमराह Bihar News: बालू के खेल में शामिल खनन निरीक्षक गिरफ्तार, DM को भी कर रहा था गुमराह Bihar Teacher News: बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर बनेगी नई पॉलिसी, शिक्षा विभाग ने कमेटी गठित की Bihar Teacher News: बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर बनेगी नई पॉलिसी, शिक्षा विभाग ने कमेटी गठित की बिहार में दिनदहाड़े लूट की वारदात से हड़कंप, CSP संचालक को गोली मारकर 5 लाख लेकर फरार हुए बदमाश बिहार में दिनदहाड़े लूट की वारदात से हड़कंप, CSP संचालक को गोली मारकर 5 लाख लेकर फरार हुए बदमाश
01-May-2025 07:21 AM
By First Bihar
Caste census: भारत में जनगणना जल्द शुरू हो सकती है। सरकार इसकी पूरी प्रक्रिया को 2026 के अंत तक पूरा करने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक समयसीमा या निर्धारित कार्यक्रम सरकार की ओर से जारी नहीं किया गया है। इससे पहले इसको लेकर यह सबसे बड़ी अड़चन यह थी कि इसमें जाति आधारित जानकारी को शामिल किया जाए या नहीं। लिहाजा अब जब इस पर निर्णय लिया जा चुका है, तो प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक, देश के अंदर अब जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इसके कारण गृह सूची और मकान गणना चरण में पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या 31 से बढ़कर 32 हो सकती है। इससे पहले मार्च 2025 में गृह मंत्रालय ने संसद की एक स्थायी समिति को बताया था कि जनगणना की अधिकांश तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अब तकनीकी अपडेट का कार्य जारी है।
गृह मंत्रालय ने समिति को बताया, “जनगणना से संबंधित कई कार्य पूर्ण हो चुके हैं। जैसे ही जनगणना की प्रक्रिया शुरू होगी, आवश्यकतानुसार अतिरिक्त धन की मांग की जाएगी।” जनगणना 2021 भारत की पहली पूर्णत: डिजिटल जनगणना होगी। इसके लिए एक मोबाइल ऐप और जनगणना पोर्टल तैयार किया जा चुका है, जिससे डेटा संग्रहण से लेकर निगरानी तक सभी कार्य डिजिटल रूप से संपन्न होंगे।
आपको बताते चलें कि,जनगणना भारत में जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, आवास और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी का सबसे बड़ा स्रोत है। यह आंकड़े नीतियों के निर्धारण, संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन और संसाधनों के वितरण में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत में पहली संगठित जनगणना 1881 में हुई थी और तब से हर 10 साल में नियमित रूप से यह होती रही है।