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21-Jan-2026 05:17 PM
By First Bihar
PATNA: बिहार में अब गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र की तरह जल परिवहन के जरिए माल ढुलाई को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आवश्यक सामानों के परिवहन के लिए सड़क और रेल के साथ-साथ जलमार्ग नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना पर काम जारी है और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक जलमार्ग से माल ढुलाई शुरू कर दी जाएगी।
अब बिहार में भी गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र की तरह जल परिवहन के जरिये माल ढ़ुलाई के लिए जल परिवहन को विकसित करने का काम किया जा रहा है। जिससे अब सड़क के अलावा प्रदेश में जलमार्ग के रास्ते भी अन्य जगहों पर जरूरी सामानों को आने-जाने के लिए नेटवर्क विकसित किया जा सकें। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर जलमार्ग के जरिये माल ढ़ुलाई का कार्य शुरू कर दिया जायेगा।
मंत्री ने जल मार्ग परिवहन की संभावनाओं का लिया जायजा
वहीं इस संदर्भ में परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने गायघाट से दीघा घाट तक वाटर मेट्रो वेसल में सफर करके जल मार्ग परिवहन व माल ढुलाई की संभावनाओं का जायजा लिया है। उन्होंने कहा कि जलमार्ग रेल और सड़क की तुलना में काफी सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। जलमार्ग के जरिये बालू, सब्जियां और भारी सामान की ढुलाई आसान हो सकती है। साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर होने की संभावना है।
पटना व भागलपुर में सुविधा उपलब्ध
अभी प्रदेश में भागलपुर-पटना में जलमार्ग की सुविधा उपलब्ध है। जिसमें रोपेक्स वेसल का निर्माण पूर्व में ही हो चुका है। इसके साथ ही बक्सर, कालूघाट, हाजीपुर, मोकामा समेत अन्य जगहों पर शहरों के बीच जलमार्ग को बढ़ावा दिया जा सकता है। साथ ही स्थानों पर नए सामुदायिक जेटी विकसित किए जायेंगे। इन जेटियों के पास हाट भी लगाये जा सकेंगे, जिससे ताजा फल-सब्जियां सीधे बेची जा सकें।
जलवाहक योजना के तहत 300 किमी से घटाकर 100 किमी करने का प्रस्ताव
इस प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद जलमार्ग के माध्यम से माल ढुलाई को और गति मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जलवाहक योजना के तहत अनुदान के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के लिए दूरी 300 किमी से कम करके 100 किमी करने का प्रस्ताव भेज दिया जा चुका है। जिससे शिप संचालकों को केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ आसानी से मिल सके। इससे न सिर्फ बिहार में जल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स, व्यापार और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। रेल एवं सड़क पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ-साथ यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित होगा।