ब्रेकिंग न्यूज़

बिहार में भगवान भी सुरक्षित नहीं: हनुमान मंदिर से लाखों के गहने चोरी, चांदी का गदा और अन्य कीमती सामान चुरा ले गए चोर बिहार की शिक्षा व्यवस्था में जल्द होने जा रहा बड़ा बदलाव, 80 हजार सरकारी स्कूलों में इस महीने से लागू होगी शैक्षणिक सुधार योजना बिहार की शिक्षा व्यवस्था में जल्द होने जा रहा बड़ा बदलाव, 80 हजार सरकारी स्कूलों में इस महीने से लागू होगी शैक्षणिक सुधार योजना देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था Bihar news : बड़ी लापरवाही! शौचालय का वेंटिलेटर तोड़कर दो लड़कियां फरार, प्रशासन में हड़कंप LPG संकट का असर: पति ने नहीं भरवाया सिलेंडर में गैस, घर छोड़कर चली गई पत्नी LPG संकट का असर: पति ने नहीं भरवाया सिलेंडर में गैस, घर छोड़कर चली गई पत्नी BIHAR NEWS : हाईटेक निगरानी से खनन माफियाओं पर शिकंजा, अब हर ट्रक पर डिजिटल नजर; चलते -चलते हो जाएगा नाप -तौल नहाय-खाय के साथ आज से चैती छठ की शुरुआत, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग होंगे पटना के 49 घाट; सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

Home / bihar / patna-news / Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर जारी, 15 साल बाद 21 नदियां...

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर जारी, 15 साल बाद 21 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, रात में भी तटबंधों की निगरानी

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। नेपाल और आसपास के राज्यों में हो रही भारी बारिश के कारण राज्य की 21 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

08-Oct-2025 07:50 AM

By First Bihar

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। नेपाल और आसपास के राज्यों में हो रही भारी बारिश के कारण राज्य की 21 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। यह स्थिति पिछले 15 वर्षों में पहली बार देखने को मिली है, जब अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह में इतनी बड़ी संख्या में नदियों ने लाल निशान पार किया हो। राज्य के कई जिलों में नदियों के उफान से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जिससे प्रशासन और आम जनता दोनों अलर्ट मोड पर हैं।


बिहार की जीवनरेखा कही जाने वाली कोसी नदी ने 57 साल में जलस्तर का दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, 5 अक्टूबर को कोसी में 5.33 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष के 6.61 लाख क्यूसेक के बाद सर्वाधिक है। वहीं, 1968 में 5 अक्टूबर को 7.88 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर माना जाता है। इसी तरह बागमती नदी ने भी इस बार अपने सर्वाधिक जलस्तर के रिकॉर्ड को लगभग छू लिया है और दूसरा सर्वोच्च जलस्तर दर्ज किया गया है। लगातार बारिश और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण नदी का प्रवाह तेजी से बढ़ रहा है।


राज्य में कोसी, बागमती, गंडक, कमला बलान, अधवारा, ललबकिया, परमान, महानंदा, पुनपुन, लखनदेई, माही, बाया, गंडकी, कर्मनाशा, दुर्गावती, मोहाने, पश्चिम कनकई, बनास, थोमाने, भूतही और घोघा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इन नदियों के उफान से सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, समस्तीपुर, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण और कटिहार जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कुछ इलाकों में पानी गांवों में घुस चुका है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।


जल संसाधन विभाग ने नदियों के तटबंधों की सुरक्षा बढ़ाने और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। अभियंताओं और तटबंध सुरक्षाकर्मियों को 24 घंटे पेट्रोलिंग के आदेश दिए गए हैं ताकि किसी भी रिसाव या टूट-फूट की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदियों के बढ़ते जलस्तर पर ड्रोन और कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। कई इलाकों में रेत की बोरियां और अस्थायी तटबंध बनाकर बचाव कार्य किए जा रहे हैं।


बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, नदियों का इस तरह से अचानक बढ़ना हमारे लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति है। फिलहाल सभी तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है और अधिकारी सतर्क हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं, जबकि राहत शिविरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है ताकि प्रभावित लोगों को आश्रय और भोजन की सुविधा मिल सके।


यह स्थिति वर्ष 2019 और 2020 के बाद फिर से दोहराई गई है। 2019 में अक्टूबर के पहले सप्ताह के अंत में 18 नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंची थीं, जबकि 2020 में 16 नदियां उफान पर थीं। लेकिन इस बार का आंकड़ा सबसे अधिक है, जो बिहार में बाढ़ के बढ़ते खतरे का संकेत देता है। नदियों का यह अप्रत्याशित व्यवहार राज्य के लिए बड़ी चिंता का विषय है। जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।