देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था देशभर के मेडिकल कॉलेजों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड अनिवार्य, अब हर मरीज के लिए आभा नंबर जरूरी; बिहार में भी जल्द लागू होगी नई व्यवस्था Bihar news : बड़ी लापरवाही! शौचालय का वेंटिलेटर तोड़कर दो लड़कियां फरार, प्रशासन में हड़कंप LPG संकट का असर: पति ने नहीं भरवाया सिलेंडर में गैस, घर छोड़कर चली गई पत्नी LPG संकट का असर: पति ने नहीं भरवाया सिलेंडर में गैस, घर छोड़कर चली गई पत्नी BIHAR NEWS : हाईटेक निगरानी से खनन माफियाओं पर शिकंजा, अब हर ट्रक पर डिजिटल नजर; चलते -चलते हो जाएगा नाप -तौल नहाय-खाय के साथ आज से चैती छठ की शुरुआत, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग होंगे पटना के 49 घाट; सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहाय-खाय के साथ आज से चैती छठ की शुरुआत, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग होंगे पटना के 49 घाट; सुरक्षा के व्यापक इंतजाम Bihar new road project : अब सफर होगा आसान! इस जिलें में 5 नई सड़कों से ट्रैफिक होगा फ्री; जानिए किस-किस इलाके में होगा निर्माण भारत-नेपाल सीमा पर SSB का बड़ा एक्शन, फर्जी आधार कार्ड के साथ बांग्लादेशी नागरिक को दबोचा
05-Oct-2025 08:36 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में अपराध सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब सामान्य और छोटे अपराध करने वालों को सलाखों के पीछे नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उन्हें समाज के लिए काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि अपराधियों को जेल में बंद करने से ज्यादा जरूरी है उन्हें समाजोपयोगी कार्यों में शामिल करना, ताकि वे अपनी गलती सुधार सकें और समाज में जिम्मेदारी के साथ दोबारा खड़े हो सकें। यही कारण है कि राज्य सरकार ने *बिहार सामुदायिक सेवा नियमावली 2025 को अधिसूचित कर दिया है।
दरअसल, नई नियमावली के तहत न्यायालय छह माह से लेकर तीन साल तक की सजा वाले मामलों में, अपराधी की पृष्ठभूमि और परिस्थिति को देखते हुए, उसे सामुदायिक सेवा की सजा दे सकेगा। दोषियों को अस्पताल, नगर निकाय, सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, पुलिस थाना, वृद्धाश्रम, वन विभाग और जू/संग्रहालय जैसे स्थानों पर सेवा देनी होगी। यह सेवा सफाई, रखरखाव, पौधरोपण, ट्रैफिक नियंत्रण, पुस्तकालय प्रबंधन और लिपिकीय कार्यों के रूप में होगी।
यह सुविधा मुख्य रूप से पहली बार अपराध करने वाले या परिस्थितिवश सामान्य अपराध में दोषी पाए गए व्यक्तियों को दी जाएगी। आदेश तभी पारित होगा जब अपराधी लिखित रूप से सामुदायिक सेवा करने के लिए सहमत होगा। सजा की अवधि अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार तय होगी, जो 1 से 31 दिन या 4 से 40 घंटे तक हो सकती है। खास बात यह है कि यह सजा अपराधी के रोजगार और शिक्षा को प्रभावित नहीं करेगी। अगर कोई दोषी सामुदायिक सेवा का पालन नहीं करता, तो न्यायालय उसे नोटिस भेजेगा और आदेश की अवहेलना करने पर मूल सजा और जुर्माना लगाया जाएगा। सेवा के दौरान किसी तरह का वेतन या पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा।
बता दें कि इसे सफल रुप प्रदान करने के लिए सामुदायिक सेवा समिति बनाई जाएंगी। जिला समिति में डीएम, एसपी, जिला कल्याण पदाधिकारी और परिवीक्षा पदाधिकारी शामिल होंगे, जबकि राज्य समिति की अध्यक्षता गृह विभाग का सचिव करेगा। इन समितियों का दायित्व होगा कि अपराधियों को उचित स्थान पर सेवा के लिए भेजा जाए और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
इस कदम से जेलों पर भार कम होगा और छोटे अपराधियों को सुधारने का मौका मिलेगा। साथ ही, समाज में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी। यह पहल न केवल अपराधियों के पुनर्वास के लिए उपयोगी है, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी अहम साबित होगी।
बिहार सरकार का यह निर्णय आपराधिक न्याय प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव है। यह पहल अपराधियों को दंडित करने की बजाय उन्हें सुधार और समाजोपयोगी बनने का अवसर देगी। सामुदायिक सेवा के जरिए अपराधियों को यह सीखने का मौका मिलेगा कि समाज के लिए काम करना ही असली जिम्मेदारी है।