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06-Mar-2026 03:03 PM
By First Bihar
Bihar news : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार (5 मार्च) को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इससे साफ हो गया है कि अब नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। इसके साथ ही उनका राजनीतिक सपना भी पूरा हो रहा है—नीतीश कुमार ऐसे नेता बन जाएंगे, जिन्होंने बिहार के चारों सदनों का सदस्य रह चुके हैं।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर लंबे समय से चलता आ रहा है। साल 1985 में उन्होंने पहली बार विधानसभा (MLA) के सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा। इसके बाद साल 1989 में वे पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए। 2005 से वे विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं और अब 2026 में राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। यह उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि पहले उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनने का मौका नहीं मिला था।
नीतीश कुमार से पहले बिहार में केवल तीन नेता ही ऐसा कर पाए हैं। इसमें शामिल हैं लालू प्रसाद यादव, दिवंगत पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, और उपेंद्र कुशवाहा। लालू प्रसाद यादव की बात करें तो उन्होंने 1977 में पहली बार छठी लोकसभा के सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा। 1980-89 तक वे बिहार विधान सभा के सदस्य रहे। 1990-95 में वे विधान परिषद के सदस्य बने और अप्रैल 2000 में राज्यसभा में जगह बनाई।
सुशील कुमार मोदी का राजनीतिक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। साल 1990 में वे पहले बार विधायक बने। 2004 में भागलपुर से लोकसभा सांसद चुने गए। 2005 में MLC बने और 2020 में राज्यसभा के सदस्य बने। उपेंद्र कुशवाहा, जो राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष हैं, साल 2000 में पहली बार विधायक बने। 2010 में वे राज्यसभा पहुंचे। 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने और 2021 में बिहार विधान परिषद के सदस्य चुने गए। वर्तमान में वे भी राज्यसभा के सदस्य हैं और 2026 के चुनाव में एनडीए समर्थित प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर चुके हैं।
नीतीश कुमार का चारों सदनों का सदस्य बनना बिहार की राजनीति में एक विशेष उपलब्धि मानी जा रही है। इससे यह साफ होता है कि उनका राजनीतिक अनुभव और जनसेवा का सफर काफी लंबा और विविध रहा है। उनके राज्यसभा में जाने के बाद बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में भी नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।नीतीश कुमार के चारों सदनों में सदस्य रहने के इस रिकॉर्ड ने उन्हें राज्य के अन्य नेताओं से अलग एक नई पहचान दी है। यह उपलब्धि उनके राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।