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30-Mar-2026 10:03 PM
By MANOJ KUMAR
MUZAFFARPUR: बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा हाल ही में जारी की गई जिलाध्यक्षों की सूची ने मुजफ्फरपुर की सियासत में हलचल तेज कर दी है। इस सूची के सामने आने के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है, जिसे लेकर आमजनों और कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
बीजेपी की तर्ज पर कांग्रेस का प्रयोग या बड़ी चूक
दरअसल, मुजफ्फरपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहले से ही संगठन को दो भागों—पूर्वी और पश्चिमी—में विभाजित कर रखा है, जहाँ दो अलग-अलग जिलाध्यक्ष कमान संभालते हैं। कांग्रेस की नई सूची देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शायद कांग्रेस ने भी इसी राह पर चलने की कोशिश की है, लेकिन पत्र की शब्दावली ने भारी भ्रम पैदा कर दिया है।
एक जिला, दो नाम: क्या है पूरा मामला: कांग्रेस द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में मुजफ्फरपुर के लिए दो प्रमुख नाम सामने आए हैं। सूची में एक ओर अरविंद कुमार मुकुल को मुजफ्फरपुर का जिलाध्यक्ष मनोनीत किया गया है, तो दूसरी ओर कांटी के वर्तमान प्रखंड प्रमुख कृपा शंकर शाही का नाम भी इसी सूची में जिलाध्यक्ष के तौर पर दर्ज है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कांग्रेस ने मुजफ्फरपुर को दो सांगठनिक जिलों में बांट दिया है? या फिर यह आलाकमान की ओर से हुई कोई बड़ी तकनीकी चूक है?
कार्यकर्ताओं में असमंजस, चर्चाएं तेज: पार्टी के भीतर इस बात को लेकर कानाफूसी शुरू हो गई है कि क्या एक ही जिले में दो जिलाध्यक्षों की घोषणा जानबूझकर की गई है या फिर प्रखंड स्तर के नेता को गलती से जिला स्तर की सूची में जगह मिल गई। यदि यह विभाजन है, तो इसकी स्पष्ट सीमा रेखा क्या है, इस पर पार्टी ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या कांग्रेस आलाकमान ने बिना होमवर्क किए ही यह सूची जारी कर दी है? प्रखंड प्रमुख को सीधे जिलाध्यक्ष की सूची में शामिल करना चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। फिलहाल, कार्यकर्ता स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह साफ हो सके कि जिले की कमान वास्तव में किसके हाथ में है।



