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Bihar News: गंगा जल बंटवारे में बिहार को पहली बार मिल सकती है हिस्सेदारी, 900 क्यूसेक पानी की अनुशंसा; जानिए.. क्या होगा असर?

24-Jan-2026 11:31 AM

By FIRST BIHAR

Bihar News: गंगा के पानी में बिहार को 900 क्यूसेक की हिस्सेदारी मिलने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह पहला अवसर होगा, क्योंकि अब तक गंगा जल बंटवारे में बिहार का कोई निर्धारित हिस्सा नहीं रहा है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन जल शक्ति मंत्रालय की आंतरिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में शुष्क अवधि के दौरान बिहार को 900 क्यूसेक पानी दिए जाने की अनुशंसा की है। जनवरी से मई तक की अवधि को शुष्क मौसम माना जाता है, जब पानी की सबसे अधिक कमी रहती है।


भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 12 दिसंबर 1996 को हुई 30 वर्षीय संधि की अवधि इस वर्ष समाप्त हो रही है। इसके नवीनीकरण की प्रक्रिया के तहत दोनों देशों द्वारा गंगा में उपलब्ध जल की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जा रहा है। यह संयुक्त आकलन पिछले सप्ताह शुरू हुआ है और मई तक चलेगा। इसके बाद जल बंटवारे का नया फार्मूला तय किया जाएगा।


सूत्रों के अनुसार, बिहार ने भी इस बार संधि में एक पक्ष बनने की इच्छा जताई थी, ताकि उसे कम-से-कम 2000 क्यूसेक पानी की हिस्सेदारी मिल सके। हालांकि प्रस्तावित संधि में फिलहाल 900 क्यूसेक की अनुशंसा की गई है, फिर भी इससे बिहार को अपने दक्षिणी क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने की उम्मीद जगी है। यह आवश्यकता पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई परियोजनाओं से भी जुड़ी हुई है।


बिहार की कई पेयजल परियोजनाएं गंगा पर निर्भर हैं। इसके अलावा दक्षिणी बिहार में स्थित जलाशयों को भरने के लिए पाइपलाइन के माध्यम से गंगा का पानी पहुंचाने का प्रस्ताव भी है। इस संबंध में राज्य के जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच बातचीत जारी है।


पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित फरक्का में 1975 में गंगा पर फरक्का बराज का निर्माण किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हुगली नदी में पानी मोड़कर कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता बनाए रखना था। बाद में सिंचाई सहित अन्य उद्देश्यों के लिए भी इसका उपयोग होने लगा। वर्ष 1996 की संधि के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे के नियमन में भी इस बराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


गंगा जल बंटवारा एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव बिहार पर पड़ता है। शुष्क मौसम में जल संकट और वर्षा ऋतु में बाढ़ की स्थिति बनी रहती है। इसका प्रमुख कारण फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद का जमा होना है। इसी वजह से बिहार को पुराने समझौते के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति रही है, क्योंकि उसमें राज्य को शामिल नहीं किया गया था। नए समझौते में बिहार के हितों को ध्यान में रखने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि अंतिम समझौता होने के बाद ही हिस्सेदारी पूरी तरह स्पष्ट होगी।


बता दें कि गंगा को बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है। जल बंटवारे के फार्मूले के निर्धारण के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का बराज तथा पद्मा नदी पर स्थित हार्डिंग ब्रिज पर जल स्तर की संयुक्त माप की जाती है। वर्तमान व्यवस्था में भारत और बांग्लादेश के बीच जल वितरण का फार्मूला तो है, लेकिन इसमें बिहार या पश्चिम बंगाल के लिए कोई आंतरिक आवंटन निर्धारित नहीं है।