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आरा सेक्स रैकेट; 2 महीने से कैसे खुला घूम रहा है दलित नाबालिग लड़की से रेप का आरोपी MLA? किसने बांधे सुशासन की पुलिस के हाथ? देखें वीडियो

12-Sep-2019 01:46 PM

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PATNA: “का हो तू भी अरूण जादव के जेल भेजबावे में लागल बाड़?  कुछ लेवे देबे के बा त ले ल, लेकिन अरूण जेल न जाये के चाही.” ये एक फोन कॉल के वार्तालाप का अंश है. एक सियासी दल के सुप्रीमो का ऐसा फोन कॉल पिछले दो महीने में न जाने कितने नेताओं और वर्दीधारियों के पास आया. सियासी गलियारे के ज्यादातर जानकार इस फोन कॉल के बारे में जानते हैं. आरा के वीभत्स सेक्स रैकेट कांड के खुलासे के लगभग दो महीने बाद जब आरोपी विधायक के खिलाफ वारंट लेने की औपचारिकता निभायी जा रही है तो सवाल उठ रहा है कि क्या इसी फोन कॉल ने दो महीने तक मानवता को तार-तार कर देने वाले वाकये के आरोपी MLA को बचाये रखा. https://youtu.be/LGiDX17IQDM नाबालिग दलित लड़की से रेप में क्यों नहीं हुई त्वरित कार्रवाई सुशासन की इसी सरकार ने कभी एक महीने से भी कम समय में भी रेप के केस में आरोपी को सजा दिलवा कर देश विदेश में नाम कमाया था. आरा रेप कांड में सरकार की साख तार-तार हो गयी लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई. 12 साल की एक दलित लड़की को सरकारी आवासीय स्कूल से अगवा कर रेप किया जाता रहा. 18 जुलाई को लड़की किसी तरह जान बचा कर भागी और पुलिस के पास पहुंच गयी. लड़की के बयान पर उसे अगवा कर जबदरस्ती देह व्यापार कराने वाली महिला अनिता देवी की गिरफ्तारी हुई. अनिता देवी ने अपने बयान में विधायक की काली करतूत को पुलिस को बता दिया. लेकिन पुलिस खामोश बैठी रही. अनिता देवी ने विधायक के अलावा एक इंजीनियर और कुछ और लोगों के नाम बताये. विधायक अरूण यादव को छोड़ कर बाकी सभी गिरफ्तार कर लिये गये. बार-बार सवाल उठ रहा है कि विधायक को क्यों छोड़ दिया गया. दो महीने तक साक्ष्यों को मिटाने की भरपूर कोशिश हुई पीड़ित नाबालिग लड़की के मुताबित इन दो महीनों के भीतर विधायक अरूण यादव के गुर्गों ने आकर उससे जबरदस्ती सादे कागज पर साइन करा लिया. उसे और उसके परिजनों को पैसे का लालच दिया गया. पैसे से बात नहीं बनती दिखी तो जान मारने की धमकी दी गयी. ये तमाम वाकये होते रहे और आरा पुलिस चुप बैठी रही. लड़की चीख चीख कर कहती रही कि अरूण यादव को फांसी दी लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा. महिला आयोग की सक्रियता से पीड़िता को मिली हिम्मत इस मामले में महिला आयोग की सक्रियता से पीड़िता को हिम्मत मिली. महिला आयोग ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को पीड़िता की देखभाल के लिए लगाया. महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ही पीड़ित लड़की अपने संरक्षण में रखा. उनकी देखभाल में ही लड़की कोर्ट गयी, जहां दुबारा उसका बयान दर्ज कराया गया. पीड़िता ने कोर्ट में फिर से अपने साथ हुई हैवानियत की कहानी सुनायी. पीड़ित लड़की के कोर्ट में दुबारा बयान के बाद पुलिस के पास कोई रास्ता नहीं बच गया था. लिहाजा विधायक अरूण यादव को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट से वारंट लेने की कवायद की जा रही है. पटना हाईकोर्ट के वकील देव कुमार पांडेय कहते हैं “पॉक्सो के ऐसे जघन्य मामले में पुलिस के पास अगर साक्ष्य हैं तो कोर्ट से वारंट लेने की कोई जरूरत नहीं है. आखिरकार इसी पुलिस ने इस कांड के दूसरे आरोपियों को बिना वारंट के ही गिरफ्तार किया है. फिर विधायक के लिए खास इंतजाम क्यों?”