धर्मचैत्र नवरात्रि कब, देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की आराधना में एक पवित्र अवसर
सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक उन्नति, समर्पण और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि, जो हिंदुओं के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण है।

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धर्मसनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक उन्नति, समर्पण और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि, जो हिंदुओं के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण है।
धर्महिंदू धर्म में पूजा-अर्चना की परंपरा में देवी-देवताओं को उनकी प्रिय वस्तुएँ अर्पित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जब भक्त अपने ईष्ट देवता को उनकी प्रिय वस्तुएँ समर्पित करते हैं, तो देवता प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
धर्मवैदिक पंचांग के अनुसार मंगलवार को हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। मंगलवार, विशेषकर माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर, भक्तगण मंदिरों में जुटकर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं।
धर्मज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो कर्म के अनुसार फल देते हैं। माना जाता है कि जब शनिदेव की कुदृष्टि जातकों पर पड़ती है, तो उनके जीवन में बाधाएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
Breakingधर्मMaha Kumbh 2025: ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बात की घोषणा उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर की है। ममता ने कहा कि वह पि
धर्मदेवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम की अनूठी परंपरा ने धार्मिक जगत में चर्चा का नया आयाम स्थापित कर दिया है। जहाँ अधिकांश ज्योतिर्लिंगों में त्रिशूल का प्रचलन है, वहीं देवघर के 22 मंदिरों के शिखरों पर पंचशूल विराजमान है।
धर्महिंदू धर्म में फाल्गुन मास का विशेष स्थान है, क्योंकि यह मास महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख त्योहारों से जुड़ा हुआ है। यह हिंदू पंचांग का अंतिम महीना है, जो आध्यात्मिकता और धर्म-कर्म के लिए उत्तम माना जाता है।
धर्मज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को मायावी ग्रह माना गया है, क्योंकि ये व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इनका संबंध न केवल ज्योतिषीय घटनाओं से है, बल्कि ये सनातन पौराणिक कथाओं से भी जुड़े हुए हैं।
धर्मसनातन पंचांग के अनुसार, 12 फरवरी 2025 को कुंभ संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन आत्मा के कारक सूर्य देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे।
धर्महर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, जो भगवान शिव के रौद्र और न्यायप्रिय स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा और व्रत रखते हैं, जिससे जीवन में आने वाले सभी कष्ट, भय और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
धर्म"मिर्जापुर" वेब सीरीज के कालीन भईया (पंकज त्रिपाठी) अपने परिवार के साथ महाकुंभ पहुंचे। जहां त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई और वट वृक्ष की पूजा की। आज उनकी इच्छा पूरी हुई। उन्होंने कहा कि भगवान ने इस पवित्र स्थान पर उन्हें आने का मौका दिया।
धर्मज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार, होली से पहले घर में मौजूद अशुभ वस्तुओं को हटाना अनिवार्य होता है, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और शुभता के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करती हैं।