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02-Apr-2025 02:55 PM
MP Salary: महंगाई के मद्देनजर सांसदों की सैलरी और भत्तों में 24% की बढ़ोतरी की गई है, जिससे उनकी मासिक तनख्वाह अब ₹1.24 लाख हो गई है। इसके अलावा, उन्हें सालाना 34 मुफ्त हवाई यात्राएं, 50,000 यूनिट मुफ्त बिजली, एसी ट्रेन सफर और ₹31,000 की पेंशन भी मिलेगी। सरकार ने इस फैसले को आवश्यक बताते हुए कहा कि हर पांच साल में सांसदों के वेतन और भत्तों की समीक्षा की जाती है।
सांसदों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
फ्री हवाई और रेल यात्रा: सांसदों को हर साल 34 फ्री हवाई टिकट मिलते हैं, जिनमें से 8 टिकट वे अपने सहयोगियों को ट्रांसफर कर सकते हैं। भारतीय रेलवे में फर्स्ट AC में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी दी जाती है।
बिजली और पानी मुफ्त: सरकारी आवास के साथ सांसदों को 50,000 यूनिट मुफ्त बिजली और 4 लाख लीटर पानी मुफ्त मिलता है। मेडिकल सुविधा: सांसदों और उनके जीवनसाथी को सरकारी व निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। जरूरत पड़ने पर विदेश में इलाज का खर्च भी सरकार उठाएगी।
अन्य लाभ: सरकारी गाड़ी, रिसर्च असिस्टेंट, सब्सिडी वाली कैंटीन और टेलीफोन सेवाओं में छूट।
सैलरी और भत्तों में क्या बदलाव हुआ?
सरकार ने लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (Cost Inflation Index) के आधार पर वेतन संशोधन लागू किया है, जिसे 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी माना जाएगा। इस बार न सिर्फ वेतन बल्कि अन्य भत्तों में भी बढ़ोतरी की गई है:
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: ₹70,000 से बढ़ाकर ₹87,000 प्रति माह
कार्यालय खर्च: ₹60,000 से बढ़ाकर ₹75,000 प्रति माह (₹50,000 कंप्यूटर ऑपरेटर और ₹25,000 स्टेशनरी के लिए)
फर्नीचर खर्च: सांसदों को ₹1 लाख तक टिकाऊ फर्नीचर और ₹25,000 तक गैर-टिकाऊ फर्नीचर खरीदने की सुविधा
डेली अलाउंस (DA): ₹2000 से बढ़ाकर ₹2500 प्रतिदिन
पूर्व सांसदों की पेंशन: ₹25,000 से बढ़ाकर ₹31,000 प्रति माह
अतिरिक्त पेंशन (5 साल से अधिक सेवा वालों के लिए): ₹2000 से बढ़ाकर ₹2500 प्रति वर्ष
2018 में भी हुआ था बड़ा बदलाव
2018 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सांसदों की सैलरी ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी थी और हर पांच साल में ऑटोमैटिक सैलरी रिव्यू का प्रावधान किया था। हालांकि, 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सांसदों की सैलरी में 30% की कटौती की गई थी, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया।
सैलरी बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार का कहना है कि महंगाई के कारण सांसदों की सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी जरूरी थी। चूंकि यह संशोधन कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के आधार पर किया जाता है, इसलिए इस बार 24% की वृद्धि हुई।