Bihar Governor : बिहार के नए राज्यपाल बने सैयद अता हसनैन, जानिए सैन्य अधिकारी से लेकर गवर्नर बनने तक का सफर बिहार को मिला नया राज्यपाल, सैयद अता हसनैन की नियुक्ति, आरिफ़ मोहम्मद ख़ान की छुट्टी राज्यपालों का बड़ा फेरबदल: नंद किशोर यादव नागालैंड के गवर्नर, सैयद अता हसनैन बने बिहार के राज्यपाल जहानाबाद: पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, SP ने 6 थानाध्यक्ष समेत 50 पुलिसकर्मियों का किया तबादला, नीचे देखें पूरी लिस्ट.. सुपौल प्रखंड कार्यालय में DM का छापा, BDO-CO सहित कई कर्मचारी मिले गायब नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले से छोटी बहन इंदू नाराज, बोलीं..भईया बिहार छोड़ेंगे तो बहुत कमी महसूस होगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले का HAM ने किया स्वागत, जानिए.. क्या बोले मंत्री संतोष सुमन? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले का HAM ने किया स्वागत, जानिए.. क्या बोले मंत्री संतोष सुमन? बेतिया में साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार, व्हाट्सएप चैट में मिला पाकिस्तान का कोड रश्मिका-विजय की रिसेप्शन पार्टी में नंगे पैर क्यों पहुंचे एक्टर राम चरण? हैरान कर देगी वजह
24-Sep-2025 08:33 AM
By First Bihar
Suraj Bhan Singh : बिहार के बेगूसराय के स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और भाजपा नेता राम लखन सिंह को दोषी करार दिया है।राम लखन सिंह और उनके ड्राइवर वीरेंद्र ईश्वर को 4 साल की सजा और जुर्माना लगाया गया है, जबकि सूरजभान सिंह को 1 साल की सजा और जमानत दी गई है। मामला 1992 का है, जब पुलिस पर गोलीबारी हुई थी और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। कोर्ट ने विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई है, जिसमें राम लखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को 4 साल तक की सजा और जुर्माना शामिल है।
यह मामला बिहार के बेगूसराय जिले से जुड़ा है, जहां एमपी-एमएलए कोर्ट ने 33 साल पुराने एक संवेदनशील मामले में सजा सुनाई है। अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को 1 साल की सजा, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता राम लखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर उर्फ शोषण सिंह को 4-4 साल की सजा दी। फैसले के बाद राम लखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, वहीं सूरजभान सिंह को केवल 1 साल की सजा होने के कारण जमानत मिल गई।
यह घटना 9 अक्टूबर 1992 की है। एफसीआई थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस को सूचना मिली थी कि एक मोम फैक्ट्री में हथियारबंद बदमाश छिपे हुए हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन वहां मौजूद बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और गोलियां चलाईं। इसी दौरान भगदड़ मच गई। इस घटना में राम लखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को पुलिस ने मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि सूरजभान सिंह भागने में सफल रहे।
घटना के बाद एफसीआई थाना में कार्यरत एएसआई उमाशंकर सिंह ने बरौनी थाना कांड संख्या 406/92 दर्ज कराया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान कुल 12 गवाहों की गवाही अदालत में दर्ज हुई। गवाहों में उस समय के जिलाधिकारी रामेश्वर सिंह ने भी कोर्ट में घटनाक्रम की पुष्टि की। लंबे समय से यह मामला न्यायालय में लंबित था और आखिरकार 33 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाकर इसे अंजाम तक पहुंचाया।
कोर्ट ने सजा के विवरण में स्पष्ट किया कि राम लखन सिंह और वीरेंद्र ईश्वर को धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत 4 साल, धारा 353 (सरकारी काम में बाधा) के तहत 1 साल, आर्म्स एक्ट की धारा 26 के तहत 3 साल और धारा 27 के तहत 3 साल की सजा दी गई। वहीं, पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को केवल धारा 353 के तहत 1 साल की सजा सुनाई गई।
पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के वकील मंसूर आलम ने जमानत की गुहार लगाई, जिस पर कोर्ट ने मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ तीन दशक पुराना यह विवाद न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंच गया। यह मामला न केवल उस समय की राजनीतिक और आपराधिक परिस्थितियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि देर से ही सही, न्याय अंततः मिलता है।