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28-Jun-2025 07:56 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार ने देश में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ई-वोटिंग प्रणाली की शुरुआत की है। अब राज्य भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां नगरपालिका चुनावों में मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वोटिंग की जा रही है। यह क्रांतिकारी व्यवस्था आज, 28 जून 2025 को आयोजित नगरपालिका चुनाव में लागू की गई है।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की इस पहल ने पारंपरिक मतदान प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव लाया है। "डिजिटल इंडिया" और "ई-गवर्नेंस" के विज़न को मजबूत करते हुए, इस तकनीक का प्रयोग खासकर उन नागरिकों के लिए किया गया है जो किसी कारणवश मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते।
राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने बताया कि यह सुविधा विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के लिए उपलब्ध कराई गई है, जिसमें वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग मतदाता, गर्भवती महिलाएं, असाध्य रोगों से ग्रसित व्यक्ति और प्रवासी मजदूर शामिल हैं। इन पात्र मतदाताओं के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे वोट डालना अब संभव हो गया है।
राज्यभर से कुल 51,157 मतदाताओं ने ई-वोटिंग के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें सबसे अधिक पंजीयन बक्सर नगर पालिका में हुआ है। इसके अलावा पटना, गया, सारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, बांका और रोहतास जैसे जिलों के नगर निकायों में भी अच्छा खासा उत्साह देखा गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित एक सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से मतदाता लॉगइन कर अपनी पहचान सत्यापित करते हैं। उसके बाद निर्धारित समयावधि में वे अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट दे सकते हैं। पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है और इसका डेटा किसी तीसरे पक्ष से साझा नहीं किया जाता। सुरक्षा के लिहाज से OTP वेरिफिकेशन, फेस रिकग्निशन और आधार आधारित प्रमाणीकरण जैसी तकनीकों का प्रयोग किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है। इससे न केवल मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी, बल्कि मतदान प्रतिशत भी बढ़ सकता है। खासकर उन वर्गों के बीच जो पारंपरिक व्यवस्था से वंचित रह जाते हैं।
चुनाव आयोग ने ई-वोटिंग के संचालन के लिए एक कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किया है जहाँ से हर गतिविधि पर रीयल टाइम निगरानी की जा रही है। किसी भी गड़बड़ी या तकनीकी समस्या की स्थिति में त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन और तकनीकी टीमों की तैनाती भी की गई है।
बिहार की यह पहल केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी ई-वोटिंग एक सामान्य प्रक्रिया बन सकती है।