1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 30 Jan 2026 12:30:51 PM IST
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women safety : बिहार के सहरसा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों, विशेषकर महिलाओं व नाबालिगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना सदर अस्पताल में हुई, जब एक नाबालिग अपनी दादी का इलाज कराने आई थी। बताया जाता है कि वह ओपीडी की पर्ची कटवाने के लिए जानकारी ले रही थी। इसी दौरान दो युवकों ने उसे बहला-फुसलाकर पुराने, बंद पड़े दो मंजिला भवन में ले जाने का प्रयास किया।
युवकों ने नाबालिग को पुराने भवन के पहले तल पर स्थित जनरल वार्ड में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने उसका दुपट्टा खींचने की कोशिश भी की। नाबालिग ने डर के बावजूद जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया और किसी तरह दोनों युवकों के चंगुल से खुद को छुड़ाकर जान बचाई। चिल्लाती हुई वह उसी तल पर चल रहे क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई की ट्रेनिंग में घुस गई, जहां डॉक्टर और नर्स मौजूद थे। डॉक्टरों और नर्सों ने तुरंत साहस दिखाया और दोनों युवकों को पकड़ने की कोशिश की। कुछ नर्सों ने मौके का वीडियो भी बनाया।
इस बीच एक युवक मौके से भाग निकला, जबकि दूसरे को कुछ समय तक रोका गया और पुलिस को डायल 112 पर सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने से पहले दूसरा युवक भी फरार हो गया। पुलिस ने पीड़ित नाबालिग से पूरी घटना का विवरण लिया और उसे सुरक्षित घर पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलते ही सदर एसडीपीओ आलोक कुमार, सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार, महिला थानाध्यक्ष ज्योति कुमारी और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ एसएस मेहता और प्रबंधक भी मौजूद थे।
पुलिस ने वीडियो के आधार पर एक आरोपी युवक की पहचान कर ली है, जबकि दूसरे की पहचान का काम जारी है। महिला थानाध्यक्ष पीड़ित नाबालिग से पूछताछ कर रही हैं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी है और जल्द ही उन्हें पकड़े जाने का दावा किया जा रहा है।
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षा केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। पुराने भवन, जो वर्षों से बंद हैं, नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुके हैं। इन भवनों में नशे की खाली बोतलें, सिल्वर फॉयल, सिगरेट और अन्य नशीली सामग्री बिखरी रहती है। प्रशासनिक नियंत्रण की कमी के कारण असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ा और इसका खामियाजा नाबालिग ने भुगता।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने कई बार प्रशासन को इस स्थिति से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अगर अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा के सवाल खड़े हो जाते हैं।
घटना के बाद डीएम और एसपी के निर्देश पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और पुलिस मिलकर कड़े कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में किसी और बच्ची या महिला के साथ ऐसा अमानवीय प्रयास न हो। यह घटना सहरसा में अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की जरूरत को उजागर करती है और समाज में सुरक्षा एवं संवेदनशीलता पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।