NEET student case : पटना नीट छात्रा केस: 17 घंटे का CCTV फुटेज क्या हुआ ? CID ने 59 पॉइंट्स पर मांगी जानकारी; जांच में आया नया मोड़

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा से जुड़े रेप और संदिग्ध मौत मामले ने पूरे बिहार में हड़कंप मचा दिया है। CID और SIT की संयुक्त जांच अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में बदल चुकी है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 30 Jan 2026 01:15:11 PM IST

 NEET student case : पटना नीट छात्रा केस: 17 घंटे का CCTV फुटेज क्या हुआ ? CID ने 59 पॉइंट्स पर मांगी जानकारी; जांच में आया नया मोड़

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 NEET student case : पटना में शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा से जुड़े रेप और संदिग्ध मौत मामले ने पूरे बिहार में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक की जांच में कई नए पहलू सामने आए हैं, जिनसे हॉस्टलों में बेटियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। अब जांच की केंद्रबिंदु यह है कि क्या छात्रा को हॉस्टल में ही नशे की गोलियां दी गई थीं और 17 घंटे का CCTV फुटेज क्यों गायब है।


जांच की कमान CID ने संभाली हुई है और SIT के साथ मिलकर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार CID ने पटना पुलिस और SIT को 59 पॉइंट्स की गाइडलाइन जारी की है, जिसमें हॉस्टल, परिवार, दोस्तों और डिजिटल सबूतों से जुड़े कई अहम बिंदुओं की जांच शामिल है। यह दिशा निर्देश 5 जनवरी की रात 9:30 बजे से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक के समय पर केंद्रित हैं, जब हॉस्टल में गतिविधियां सबसे संदिग्ध मानी जा रही हैं।


FSL की रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर जो स्पर्म सैंपल मिला है, उसकी उम्र 18 से 21 साल के युवकों के अनुरूप बताई गई है। इस आधार पर अब चार-पांच युवक जांच के दायरे में हैं। CID का फोकस इस बात पर है कि छात्रा को हॉस्टल में एंटी-डिप्रेसेंट या सेडेटिव दवाएं दी गई थीं या नहीं। कमरे से तीन खाली दवा स्ट्रिप मिली, लेकिन पुलिस को केवल एक स्ट्रिप सौंपे जाने से संदेह और गहरा गया है। नाबालिग छात्रा के पास इतनी अधिक मात्रा में दवाओं का होना, वार्डेन द्वारा परिजनों को दवाएं सौंपना और पुलिस को तुरंत सूचना न देना सभी बिंदु जांच के घेरे में हैं।


हॉस्टल में CCTV कैमरा न होना, दरवाजा तोड़ने से पहले किसी प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी न होना और हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी के बावजूद अन्य जिम्मेदारों की भूमिका भी CID के विशेष फोकस में हैं। जांच टीम यह भी देख रही है कि क्या इससे पहले हॉस्टल में इस तरह की कोई घटना हो चुकी है।


जांच का एक और महत्वपूर्ण एंगल यह है कि 26 दिसंबर को छात्रा का पूरा परिवार अचानक हॉस्टल क्यों पहुंचा और छात्रा को घर क्यों ले जाया गया। सामान्य परिस्थितियों में छात्राएं अकेले आती-जाती हैं। घर जाते समय CCTV फुटेज में छात्रा और परिजनों के व्यवहार का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही घर पर नौ दिन रुकने के दौरान छात्रा की मानसिक स्थिति, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और FIR दर्ज कराने में हुई देरी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।


अस्पताल में बयान न देना और पहले केस नहीं करना चाहते संदेश भी जांच के दायरे में शामिल हैं। जहानाबाद स्थित छात्रा के घर में क्या हुआ, इसकी भी जांच जारी है। 26 दिसंबर से 5 जनवरी तक छात्रा घर पर थी। इस दौरान वह कहां गई, किन लोगों से मिली और उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी, यह सभी पहलू SIT के रडार पर हैं। गांव के पड़ोसी, रिश्तेदार और चौकीदार से पूछताछ की जा रही है। यह भी देखना है कि कहीं दवा या किसी जहरीले पदार्थ की व्यवस्था घर से तो नहीं की गई थी। मोबाइल सर्च हिस्ट्री और अचानक तबीयत बिगड़ने की टाइमलाइन इस संभावना को मजबूत करती है।


5 जनवरी को पटना पहुंचने के बाद छात्रा के किसी दोस्त या परिचित से मिलने की संभावना भी CID की जांच में है। ऑटो चालकों से पूछताछ, स्टेशन और रास्ते के CCTV फुटेज, मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की संभावना, सोशल मीडिया चैट और कोचिंग से जुड़े दोस्तों से जानकारी जुटाई जा रही है। NEET परीक्षा के दबाव और निजी रिश्तों से जुड़े तनाव भी जांच में शामिल हैं।


जांच का सबसे संवेदनशील समय 5 जनवरी साढ़े नौ बजे से 6 जनवरी शाम चार बजे के बीच माना जा रहा है। इसी दौरान छात्रा के कमरे के बाहर कोई CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं है, जिससे आशंका है कि इसी वक्त उसे दवाएं दी गईं या उसने स्वयं ली हों। फुटेज में किसी भी छेड़छाड़ का पता लगाने के लिए DVR की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। मोबाइल गतिविधियां, अन्य मोबाइल की मौजूदगी और दरवाजा तोड़ने से पहले की गतिविधियां भी इसी समय सीमा के भीतर देखी जा रही हैं।


CID ने यह तथ्य भी अहम माना है कि छात्रा की मामा से लगातार हो रही बातचीत 25 नवंबर के बाद अचानक बंद हो गई थी। इसे मानसिक सहयोग के खत्म होने और संभावित तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड और परिवार के भीतर संबंधों की गहन जांच की जा रही है।


अब SIT का फोकस चार-पांच ऐसे युवकों पर है जिनकी उम्र 18 से 21 साल है और जिनका हॉस्टल या छात्रा से सीधा संपर्क रहा। 25 लोगों के DNA टेस्ट में इनमें से कुछ युवकों के सैंपल FSL में मिले सैंपल से मिलाए जा रहे हैं। 18 से 21 वर्ष के दो युवक सीधे तौर पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े हुए हैं, इनमें हॉस्टल मालिक मनीष रंजन का बेटा और हॉस्टल संचालक का बेटा शामिल हैं। इनके अलावा जहानाबाद के दो अन्य युवक भी संदिग्ध हैं, जिनका छात्रा से संपर्क था।


SIT इन सभी युवकों की हॉस्टल में मौजूदगी, आवाजाही, कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा और छात्रा से संपर्क की टाइमलाइन का मिलान कर रही है। हॉस्टल इलाके का डंप टावर डेटा भी खंगाला जा रहा है, ताकि घटना वाली रात इन युवकों की मोबाइल गतिविधियों का मिलान किया जा सके।


इस मामले में हर नया खुलासा बिहार के हॉस्टलों में बेटियों की सुरक्षा पर सवाल उठाता है और जांच अभी भी संवेदनशील मोड़ पर है। CID और SIT की संयुक्त कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के प्रयास में है कि छात्रा को न्याय मिले और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।