BIHAR NEWS : बिहार में डिजिटल क्रांति! “बिहार वन” से घर बैठे मिलेंगी सभी सरकारी सेवाएं; इस महीने से होगी शुरुआत Bihar Teacher News: बिहार में शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी ! इनलोगों का 1 से 10 अप्रैल के बीच होगी जॉइनिंग; जानिए पूरा अपडेट IAS ranking Bihar : बिहार की नई IAS सीनियरिटी लिस्ट ने सबको चौंका दिया, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत चौथे नंबर पर, जानिए टॉप पर है किसका नाम... medicine price hike : 1 अप्रैल से दवाएं महंगी! पेरासिटामोल-एंटीबायोटिक के बढ़ेंगे दाम, जानिए कितना पड़ेगा असर BIHAR NEWS : पटना से बड़ा ऐलान! अब देश के किसी भी कोने से मदद मांग सकेंगे बिहार के प्रवासी मजदूर LPG supply rule : यदि आपके भी घर के पास पहुंच गई है PNG तो अब हर हाल में लेना होगा कनेक्शन, सरकार का सख्त आदेश, कहा —सिलेंडर होगा बंद PNG online apply : बिहार में PNG कनेक्शन लेना हुआ आसान, इस तरह ऑनलाइन करें अप्लाई; LPG पर नए नियम से उपभोक्ताओं में हलचल IRCTC fine : पटना- टाटा वंदे भारत में यात्रियों को परोसा गया खराब खाना, अब रेलवे ने लिया एक्शन; IRCTC और वेंडर पर लगाया लाखों का जुर्माना Bihar school : बिहार के स्कूलों में अब हर सुबह राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से होगी शुरुआत – जानें नए निर्देश और नियम बाढ़ में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में खाली रह गई कुर्सियां, प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन पर उठ रहे सवाल
04-Aug-2025 01:25 PM
By FIRST BIHAR
Shibu Soren: झारखंड की आत्मा और आदिवासी समाज की आवाज माने जाने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने 81 वर्ष की उम्र में 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 19 जून से अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी हालत में सुधार लाने की लगातार कोशिशें हो रही थीं, लेकिन अंततः वे ज़िंदगी की जंग हार गए।
आदिवासी अधिकारों के योद्धा
शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन झारखंड और आदिवासियों के हक की लड़ाई में समर्पित किया। उन्हें "दिशोम गुरु", यानी देश का गुरु, की उपाधि उनके संघर्ष और नेतृत्व के लिए दी गई। इस उपाधि की जड़ें संथाली भाषा में हैं "दिशोम" का अर्थ देश या समुदाय और "गुरु" का अर्थ मार्गदर्शक। उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित किया, उन्हें उनके हक के लिए खड़ा होना सिखाया और झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। यही पार्टी आज उनके पुत्र हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में शासन कर रही है।
13 साल की उम्र में संघर्ष की शुरुआत
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। जब वे 13 साल के थे, तब 1957 में उनके पिता की महाजनों द्वारा हत्या कर दी गई। यह घटना उनके जीवन का मोड़ बनी और उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया।
"जमीनों धान काटो" आंदोलन
1970 के दशक में महाजनों के बढ़ते अत्याचार के खिलाफ शिबू सोरेन ने “जमीनों धान काटो आंदोलन” चलाया। इस अभियान में आदिवासी महिलाएं धान काटती थीं और पुरुष तीर-धनुष लेकर उनकी सुरक्षा करते थे। इसी जनांदोलन ने उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित किया।
झारखंड राज्य का सपना
1972 में शिबू सोरेन ने राजनीति में कदम रखा और 1973 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। 1980 में वे पहली बार दुमका से लोकसभा सांसद बने। वे 8 बार लोकसभा सांसद और तीन बार केंद्रीय कोयला मंत्री रहे। झारखंड को अलग राज्य बनाने की उनकी लड़ाई 15 नवंबर 2000 को सफल हुई।
शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। पहली बार 2005 में 10 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार 2008 में वे झारखंड के सीएम बने और तीसरी बार 2009 में झारखंड के मुख्यमंत्री बने। उनका जीवन आदिवासी समाज के लिए एक मार्गदर्शन था, जो अब भी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।