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12-Jul-2021 04:59 PM
PATNA : उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नई नीति लागू किए जाने के बाद अब इस पर बिहार में भी बहस छिड़ी हुई है. लेकिन सियासी बयान बाजी के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लाने से बहुत फायदा नहीं होने वाला. सीएम नीतीश ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून से कोई बहुत फर्क नहीं पड़ेगा. इसके लिए जरूरी है कि शिक्षा का स्तर सुधारा जाए और जागरूकता लाई जाए.
नीतीश कुमार ने कहा है कि चीन जैसे देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक कानून लाया गया. लेकिन आज सीन में हालात क्या है, यह सबको मालूम है. वह पहले से कहते आ रहे हैं कि अगर आप शिक्षा का स्तर महिलाओं के बीच में सुधरेंगे. तो जागरूकता से प्रजनन दर में नियंत्रण हो पाएगा.
नीतीश कुमार ने कहा कि जब महिलाएं पढ़ी लिखी होंगी, तो जागृति आती है और अपने आप प्रजनन दर में कमी हो जाती है. नीतीश कुमार ने कहा कि जो सर्वे कराए गए हैं, वह बताते हैं कि अगर महिला शिक्षित हो तो प्रजनन दर भी ऑप्शन कम हो जाता है. मैट्रिक और इंटर शिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर कम पाया गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि 2040 तक के जनसंख्या नियंत्रण हो जाएगा और उसके बाद जनसंख्या की रफ्तार कम होगी.
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने व्यंग भरे लहजे में कहा कि कभी-कभी पढ़े लिखे लोग भी अपवाद के तौर पर ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं. नीतीश कुमार इशारों ही इशारों में कहीं न कहीं लालू परिवार के ऊपर तंज कस गए.
कॉमन सिविल कोड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से की गई टिप्पणी को लेकर जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल किया गया तो वह इस सवाल को टाल गए. नीतीश ने कहा कि कॉमन सिविल कोड का मतलब बाद में आता है. उससे पहले नशाबंदी जैसा मामला है. नशा बंदी को लेकर बिहार सरकार ने जो कदम उठाया है. पहले उस पर बात होनी चाहिए और देश भर में नशा बंदी लागू होनी चाहिए.