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28-Mar-2022 01:55 PM
DELHI : कोरोनावायरस के दौर में भले ही स्वास्थ्य कर्मियों को भगवान का दर्जा दिया गया हो लेकिन महामारी खत्म होने के बाद अब सरकारी सिस्टम में ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों को चलता करने का कदम उठा लिया है. खबर दिल्ली के एक बड़े अस्पताल एलएनजेपी से है. यहां कोरोनावायरस मैन पावर कम होने के कारण 300 से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ की भर्ती की गई थी लेकिन अब कोरोना की तीसरी लहर खत्म होने के बाद 93 नर्सिंग स्टाफ को चलता कर दिया गया है. कोरोना की तीसरी लहर थमने के बाद अब अस्पताल में छटनी का फरमान सुना दिया है.
आपको बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पिछले साल मई महीने में दिल्ली में जब कोरोना कहर बरपा रहा था तो अस्पताल को नर्सिंग स्टाफ की जरूरत महसूस हुई. इस दौरान तीन सौ से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ को अस्थाई तौर पर अस्पताल में भर्ती किया. उन्हें एलएनजेपी के साथ-साथ रामलीला मैदान में दिल्ली सरकार की तरफ से बनाए गए कोविड-19 में ड्यूटी दी गई लेकिन अब महामारी थमने के बाद इन्हीं में से 93 नर्सिंग स्टाफ को चलता कर दिया गया है.
एलएनजेपी हॉस्पिटल की तरफ से यह आदेश आने के बाद नर्सिंग स्टाफ समझ नहीं पा रहे कि वह आगे क्या करें. रामलीला मैदान में काम करने वाले नर्सिंग स्टाफ को व्हाट्सएप मैसेज के जरिए यह जानकारी दी गई कि उनकी सेवाएं खत्म कर दी गई हैं और कल से काम पर आने की जरूरत नहीं है.
कोरोना की दूसरी लहर में जिन नर्सिंग स्टाफ ने अपना जीवन जोखिम में डालकर दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर बनाए रखा उन्हें अब परिवार चलाने के संकट का सामना करना पड़ेगा. 11 महीने से काम करने वाले इन नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया गया है और सेवा समाप्त कर दी गई. नर्सिंग स्टाफ को ₹2000 प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता था लेकिन अब इनकी सेवा ही खत्म कर दी गई है.