PMCH के 35 जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ क्यों हुआ केस? मंत्री के हस्तक्षेप के बाद थाने में FIR दर्ज PMCH के 35 जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ क्यों हुआ केस? मंत्री के हस्तक्षेप के बाद थाने में FIR दर्ज मातम में बदली होली की खुशी: बिहार में दो सड़क हादसों में दो युवकों की मौत, तीन लोग घायल मातम में बदली होली की खुशी: बिहार में दो सड़क हादसों में दो युवकों की मौत, तीन लोग घायल पटना में होली के दिन बड़ा हादसा: कार वॉशिंग सेंटर में लगी भीषण आग, दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं पटना में होली के दिन बड़ा हादसा: कार वॉशिंग सेंटर में लगी भीषण आग, दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: खाद, सोना और खजूर की सप्लाई पर संकट Highway driving safety tips: हाईवे पर ड्राइविंग के दौरान न करें ये गलतियां, छोटी चूक भी बन सकती है जानलेवा Highway driving safety tips: हाईवे पर ड्राइविंग के दौरान न करें ये गलतियां, छोटी चूक भी बन सकती है जानलेवा पटना NEET छात्रा मौत मामला: CBI ने केस में जोड़ी POCSO की धाराएं, जांच का दायरा बढ़ा
12-Jun-2025 01:48 PM
By First Bihar
Life Style: राजधानी पटना में पिछले चार से पांच दिनों से झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पीएमसीएच, एनएमसीएच, आइजीआईएमएस और न्यू गार्डिनर रोड जैसे प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में 20 से 25 प्रतिशत मरीज गर्मी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित पाए जा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, गर्मी के कारण पेट की गड़बड़ी, गैस, अपच, दस्त, उल्टी, सिरदर्द, चर्म रोग, सर्दी-खांसी और बुखार जैसे लक्षणों में वृद्धि हो रही है। पीएमसीएच के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार झा ने बताया कि तेज धूप के कारण फंगल इन्फेक्शन, टीनिया, खुजली व एलर्जी के मामले बढ़े हैं।
बढ़ती गर्मी का असर बच्चों, बुजुर्गों और घरों में रहने वाली महिलाओं पर अधिक देखने को मिल रहा है। उनके बीच बेचैनी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, कमजोरी, थकावट और तनाव की समस्याएं अधिक सामने आ रही हैं। महामारी पदाधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि हीटवेव से पीड़ित मरीजों का इलाज सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है। यदि किसी रोगी को 104 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार है, भ्रम की स्थिति है, या उसकी हृदयगति असामान्य है, तो उसे तुरंत क्लिनिकल और लैब जांच की आवश्यकता होती है, जैसे कि ECG, ब्लड काउंट, इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट, किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट।
सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ORS, IV फ्लूइड्स, एंटी डायरियल, एंटी इमेटिक और एंटी अमीबिक दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। डेडिकेटेड हीटवेव वार्ड में AC या कूलर की सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए। जिन एंबुलेंस से मरीजों को रेफर किया जा रहा है, उनमें एयर कंडीशनिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डॉक्टरों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे गर्मी जल्दी असर दिखाती है। ऐसे में हमें आहार-विहार में संयम बरतना चाहिए और भोजन में कुछ बदलाव को अपनाना जरुरी है, जिसमें हल्का, सुपाच्य और तरल भोजन लें। मिट्टी के बर्तन में रखा ठंडा पानी, आम, अंगूर, अनार, गन्ना जैसे रसदार फलों से बने पेय पानक का सेवन करें। गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी से बना गुलकंद गर्मी का प्रभाव कम करता है। इसके साथ ही पहनावा और दिनचर्या में भी कुछ आदते अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें धूप से बचें, ढीले और हल्के कपड़े पहनें। चंदन का लेप करें और ठंडे पानी से स्नान करें। खाली पेट धूप में न निकलें और ज्यादा मेहनत या व्यायाम से बचें। गाय का घी नाक में दो बूंद डालना लू से सुरक्षा में सहायक मिलता है।
गर्मी से प्रभावित मौसम में लोगों को घर से बाहर निकलने पर खास सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए धूप के समय बाहर जाना जोखिम भरा हो सकता है। जल्द ही गर्मी के प्रकोप से राहत नहीं मिली तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है।