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11-Nov-2025 10:23 PM
By First Bihar
JHARKHAND: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह करने के बाद कोई व्यक्ति किसी भी धार्मिक या निजी कानून का सहारा लेकर दूसरी शादी नहीं कर सकता। धनबाद के पैथॉलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद अकील आलम के मामले में कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है, अकील आलम ने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी की थी।
हाईकोर्ट के जस्टिस एस.एन. प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने देवघर फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 4(ए) के अनुसार विवाह तभी वैध होता है जब पति या पत्नी में से कोई भी पहले से जीवित जीवनसाथी न रखता हो। यह अधिनियम “नॉन ऑब्स्टांटे क्लॉज” के तहत लागू है और यह किसी भी निजी या धार्मिक कानून से ऊपर है।
जानकारी के अनुसार डॉ. अकील आलम ने 4 अगस्त 2015 को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह किया था। कुछ समय बाद उनकी पत्नी घर छोड़कर देवघर चली गईं। अकील ने देवघर फैमिली कोर्ट में वैवाहिक अधिकार बहाल करने की याचिका दायर की, लेकिन पत्नी ने आरोप लगाया कि अकील आलम पहले से शादीशुदा हैं और उनकी पहली पत्नी से दो बेटियां हैं। उसने यह भी कहा कि अकील ने संपत्ति अपने नाम करवाने का दबाव बनाया और मना करने पर उसके साथ मारपीट की।
सुनवाई के दौरान अकील ने स्वीकार किया कि उनकी पहली पत्नी जीवित हैं और विवाह के पंजीयन के समय यह तथ्य छिपाया गया था। फैमिली कोर्ट ने दूसरी शादी को अवैध घोषित किया, जिसके खिलाफ अकील ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अब हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह करने वालों पर यह कानून समान रूप से लागू होगा।