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26-Jun-2025 12:22 PM
By First Bihar
Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा में हर साल लाखों उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन सफलता चंद मेहनती और समर्पित अभ्यर्थियों को ही मिलती है। यह परीक्षा न सिर्फ ज्ञान और समझ का मूल्यांकन करती है, बल्कि एक उम्मीदवार की मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास और समर्पण की भी परीक्षा होती है। ऐसी ही एक मिसाल हैं IAS तपस्या परिहार, जिन्होंने संसाधनों की सीमाओं और सुविधाओं की कमी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बल्कि इन्हीं चुनौतियों को अपना हौसला बना लिया और अपनी मेहनत से UPSC जैसी कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल की।
तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव जबेरा की रहने वाली हैं। उनका परिवार कृषि पर निर्भर है और उनके पिता एक साधारण किसान हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी तपस्या ने बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीरता दिखाई। वह हमेशा से अनुशासित और मेहनती छात्रा रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की, जहां से उन्हें एक मजबूत शैक्षणिक आधार मिला। बचपन से ही उनके अंदर कुछ अलग करने की ललक थी, लेकिन उन्हें खुद भी उस समय यह नहीं पता था कि एक दिन वे देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का हिस्सा बनेंगी।
12वीं कक्षा के बाद तपस्या ने पुणे स्थित ILS लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। लॉ की पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का विचार स्पष्ट हुआ। वे समझने लगी थीं कि प्रशासनिक सेवा के जरिए वे समाज के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं। उन्होंने यह भी देखा कि अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को ठीक से नहीं समझा जाता, इसलिए उनका सपना बन गया कि वे खुद अधिकारी बनकर इन समस्याओं को जमीनी स्तर पर सुलझाएं।
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद तपस्या ने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। पहली बार उन्होंने 2016 में परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। वे प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पास नहीं कर पाईं। यह असफलता उनके लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने इसे अपने आत्मबल पर हावी नहीं होने दिया। असफलता से उन्होंने सीखा, आत्मविश्लेषण किया और अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार किया।
तपस्या ने दूसरे प्रयास की तैयारी पूरी तरह से रणनीतिक ढंग से की। इस बार उन्होंने कोचिंग क्लास का सहारा नहीं लिया और सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया। वे मानती हैं कि अगर आपके पास मजबूत इच्छा शक्ति और समर्पण हो, तो आत्म-अध्ययन से भी आप किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने खुद के लिए एक सख्त टाइम टेबल बनाया और उसका ईमानदारी से पालन किया। उन्होंने पिछले साल के प्रश्नपत्रों को गहराई से समझा, एनसीईआरटी किताबों और स्टैंडर्ड बुक्स का बार-बार अध्ययन किया, साथ ही करंट अफेयर्स पर विशेष ध्यान दिया।
अपनी तैयारी के दौरान तपस्या ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। वे मानती हैं कि पढ़ाई के समय डिजिटल डिवाइसेज़ और सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल ध्यान भटका सकता है। इसलिए उन्होंने खुद को सिर्फ पढ़ाई और समाचार पत्रों तक सीमित कर लिया। वे नियमित रूप से मॉक टेस्ट देती थीं और उनका विश्लेषण करके अपनी कमियों को पहचानती थीं। यही निरंतर अभ्यास और आत्म-विश्लेषण उनकी सफलता की कुंजी बना।
तपस्या का कहना है कि सिविल सेवा की तैयारी एक लंबी और कठिन यात्रा होती है, जिसमें आत्मनियंत्रण और धैर्य सबसे जरूरी गुण हैं। वे कहती हैं कि इस दौरान कई बार मन विचलित होता है, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और आप ईमानदारी से मेहनत करते रहें, तो सफलता जरूर मिलती है। उनके परिवार ने भी इस सफर में उनका भरपूर साथ दिया। भले ही संसाधन सीमित थे, लेकिन भावनात्मक समर्थन ने उन्हें हर बार आगे बढ़ने की ताकत दी।
2017 में तपस्या ने अपने दूसरे प्रयास में न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर सभी को चौंका दिया। उनकी इस उपलब्धि ने ना केवल उनके गांव और जिले का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे देश भर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
आज तपस्या परिहार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी हैं और अपने कार्य के जरिए समाज में बदलाव ला रही हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले युवा भी असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। तपस्या की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहते।
उनकी सफलता यह सिखाती है कि UPSC की तैयारी में सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं। अनुशासन, नियमितता, आत्म-विश्वास, सही रणनीति और समर्पण। कोचिंग या महंगे संसाधन जरूरी नहीं, जरूरी है खुद पर विश्वास और लगातार मेहनत। तपस्या की यह यात्रा यह भी दिखाती है कि अगर कोई भी लड़की या लड़का सच्चे मन से इस परीक्षा की तैयारी करता है, तो वह हर बाधा को पार कर सकता है।
किसान की बेटी से लेकर देश की सेवा में लगे एक जिम्मेदार अफसर बनने तक तपस्या परिहार का सफर वास्तव में प्रेरणादायक है। उनकी यह कहानी आज लाखों युवाओं को यह विश्वास देती है कि परिश्रम और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता और यही किसी भी सपने को साकार करने का असली मंत्र है।