Joint Income Tax: देश में आयकर व्यवस्था को सरल और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक नई पहल का सुझाव सामने आया है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की तर्ज पर पति-पत्नी के लिए संयुक्त आयकर रिटर्न प्रणाली लागू की जाए। इस प्रणाली से विवाहित जोड़ों को टैक्स बचाने और आयकर प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने में मदद मिलेगी।


संयुक्त आयकर प्रणाली से होने वाले लाभ

टैक्स का बोझ कम होगा

इस प्रणाली में पति-पत्नी की आय को जोड़कर एकल टैक्स योग्य यूनिट माना जाएगा। इससे संयुक्त फाइलिंग के तहत अतिरिक्त कटौती और अनुकूल टैक्स दरों का लाभ मिलेगा, जिससे परिवार की कर देयता में कमी आएगी।


एकल आय वाले परिवारों को राहत

वर्तमान में अलग-अलग रिटर्न भरने का लाभ उन परिवारों को मिलता है, जहां पति-पत्नी दोनों कमाते हैं। लेकिन संयुक्त प्रणाली से एकल आय अर्जित करने वाले परिवारों को भी टैक्स छूट का फायदा मिलेगा।


कर चोरी में कमी

ICAI का मानना है कि इस व्यवस्था से कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी। विवाहित जोड़ों को व्यक्तिगत या संयुक्त प्रणाली में से किसी एक को चुनने की स्वतंत्रता दी जाएगी।

प्रस्तावित टैक्स स्लैब (संयुक्त रिटर्न)

आय सीमा    टैक्स दर (%)

6 लाख रुपये तक    कोई टैक्स नहीं

6-14 लाख रुपये    5%

14-20 लाख रुपये    10%

20-24 लाख रुपये    15%

24-30 लाख रुपये    20%

30 लाख रुपये से अधिक    30%


छूट सीमा का विस्तार

अगर यह प्रणाली लागू होती है, तो विवाहित जोड़ों के लिए आयकर छूट सीमा मौजूदा 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 14 लाख रुपये की जा सकती है। वहीं, व्यक्तिगत छूट सीमा को 3 लाख रुपये से दोगुना कर 6 लाख रुपये तक करने का भी प्रस्ताव है।


क्या सरकार इस बजट में इसे लागू करेगी?

ICAI का यह सुझाव सरकार के विचाराधीन है। अगर इसे इस साल के बजट में शामिल किया जाता है, तो यह प्रणाली देश के लाखों विवाहित जोड़ों के लिए टैक्स में राहत का बड़ा माध्यम बन सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को कैसे अमल में लाती है और संयुक्त आयकर रिटर्न प्रणाली से करदाताओं को क्या सुविधाएं प्रदान करती है।