1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jan 16, 2026, 8:38:49 PM
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Pharmacist recruitment Bihar: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार से जुड़े फार्मासिस्ट बहाली मामले में बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि फार्मासिस्ट के पद पर केवल डिप्लोमा इन फार्मेसी (D-Pharma) धारक अभ्यर्थियों की ही बहाली की जा सकती है। इस मामले में पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
दरअसल, फार्मासिस्ट की बहाली के लिए बनाई गई नियमावली को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नियमों को सही ठहराते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के माध्यम से चुनौती दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार के कानून को वैध मानते हुए सभी अर्जियों को नामंजूर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फार्मासिस्ट पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता डी-फार्मा ही होगी। बी-फार्मा और एम-फार्मा डिग्री धारक अभ्यर्थी फार्मासिस्ट के पद के बजाय अन्य उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन फार्मासिस्ट पद पर बहाली केवल डी-फार्मा योग्यताधारी अभ्यर्थियों की ही होगी।
बता दें कि राज्य सरकार ने फार्मासिस्टों की बहाली के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी को अनिवार्य योग्यता तय करते हुए बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से फार्मासिस्ट के 2473 पदों पर नियमित बहाली के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत विज्ञान विषय से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होने के साथ राज्य के मान्यता प्राप्त फार्मेसी संस्थान से डी-फार्मा की डिग्री और बिहार फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य शर्त रखी गई थी।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन अभ्यर्थियों ने डी-फार्मा के बाद बी-फार्मा या एम-फार्मा की डिग्री प्राप्त की है, वे भी फार्मासिस्ट पद के लिए योग्य माने जाएंगे, बशर्ते उनके पास डी-फार्मा की मूल योग्यता हो।
इसके अलावा बिहार सरकार ने बिहार फार्मासिस्ट संवर्ग नियमावली 2014 में संशोधन करते हुए चयन प्रक्रिया को और स्पष्ट किया है, जिसके तहत 75 अंकों की लिखित परीक्षा और 25 अंक अनुभव के लिए निर्धारित किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से फार्मासिस्ट बहाली को लेकर चल रहा विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है।