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30-Jan-2026 11:48 AM
By First Bihar
Bihar Land Registration : बिहार में जमीन और मकान की रजिस्ट्री को लेकर सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। आज से राज्य में 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की जमीन, प्लॉट, दुकान या मकान की रजिस्ट्री के लिए पैनकार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए नियम को लेकर मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिलों के अवर निबंधकों और निबंधन कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, जिनका अनुपालन भी शुरू हो चुका है।
इस संबंध में उप निबंधन महानिरीक्षक, बिहार संजय कुमार ने पत्र जारी कर सभी निबंधन कार्यालयों को निर्देश दिया है कि नए नियम को सख्ती से लागू किया जाए। अब बिना पैनकार्ड के 10 लाख रुपये या उससे अधिक की संपत्ति का निबंधन नहीं किया जाएगा। यह नियम शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू होगा।
पहले क्या था नियम
अब तक पैनकार्ड देने की अनिवार्यता 30 लाख रुपये या उससे अधिक की खरीद-बिक्री या एग्रीमेंट पर लागू थी। लेकिन आयकर विभाग की जांच में यह सामने आया कि 10 लाख से अधिक कीमत की जमीन या संपत्ति के कई सौदे बिना पैनकार्ड के ही निबंधित हो रहे थे। इससे न तो खरीदार और न ही विक्रेता की आय का सही-सही आकलन हो पा रहा था और टैक्स चोरी की संभावना बनी रहती थी।
पैनकार्ड नहीं है तो क्या होगा?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के पास पैनकार्ड नहीं है, उन्हें आयकर विभाग का फॉर्म 60 या 61 भरकर देना होगा। यह फॉर्म इस बात की घोषणा होता है कि संबंधित व्यक्ति के पास फिलहाल पैनकार्ड नहीं है, लेकिन उसका लेन-देन रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। इसका उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और भविष्य में ऐसे लेन-देन को ट्रैक करना है।
जिलों में लागू होना शुरू
पूर्णियां जिले के अवर निबंधक उमा शंकर मिश्र ने बताया कि विभागीय आदेश का पालन पूर्णियां में शुरू कर दिया गया है। निबंधन कार्यालय के बाहर सूचना पट्ट पर नए नियम से संबंधित आदेश की प्रति भी चस्पा कर दी गई है। साफ तौर पर कहा गया है कि 10 लाख से ऊपर की संपत्ति की रजिस्ट्री पैनकार्ड के बिना नहीं होगी।
आयकर विभाग की भूमिका
यह पूरा कदम आयकर विभाग के पत्र के बाद उठाया गया है। आयकर विभाग ने देखा था कि कई लोग छोटे-छोटे प्लॉट, दुकान या जमीन, जिनकी कीमत 10 लाख रुपये से अधिक होती है, उनकी लगातार खरीद-बिक्री कर रहे थे, लेकिन उनके दस्तावेजों में पैनकार्ड संलग्न नहीं होता था। इससे ऐसे लोगों की आय और लेन-देन का कोई ठोस रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं रहता था।
50 लाख से ऊपर टीडीएस का नियम
गौरतलब है कि 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति खरीदने पर खरीदार को 1 प्रतिशत टीडीएस काटकर आयकर विभाग में जमा करना अनिवार्य है। यदि इसका पालन नहीं किया गया, तो टीडीएस की दर 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। नए नियम के बाद ऐसे मामलों की निगरानी और भी आसान हो जाएगी।
आम लोगों को क्या फायदा
सरकार का कहना है कि इस सख्ती का सबसे बड़ा फायदा आम खरीदारों को होगा। डिजिटल रिकॉर्ड, पैनकार्ड से लिंक डेटा और सख्त सत्यापन से फर्जी बिक्री, बेनामी सौदे और डुप्लीकेट रजिस्ट्री के मामलों में कमी आएगी। इससे जमीन विवाद घटेंगे और लोगों का भरोसा निबंधन प्रक्रिया पर बढ़ेगा।
सरकार को भी होगा लाभ
इस फैसले से सरकार को टैक्स चोरी और काले धन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। बड़े लेन-देन पारदर्शी होंगे और आयकर विभाग के पास हर सौदे का स्पष्ट रिकॉर्ड रहेगा। कुल मिलाकर, बिहार में जमीन रजिस्ट्री को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।