मधुबनी की शांभवी प्रिया ने बिहार में लहराया परचम, मैट्रिक में 7वां रैंक हासिल बिजली मिस्त्री की बेटी बनीं जिला टॉपर, 478 अंक लाकर राखी ने रचा सफलता का नया इतिहास दवा व्यवसायी को बदमाशों ने बनाया निशाना, बाइक की डिक्की तोड़कर 65 हजार रुपये ले भागे एकतरफा प्यार में युवक की हत्या, लड़की के भाई और दोस्त को पुलिस ने दबोचा राबड़ी आवास में लौंडा डांस का आयोजन, लालू -तेजस्वी समेत कई कार्यकर्ता रहे मौजूद बिहार को जल्द मिलेंगे 25 नए IAS अधिकारी, इस दिन करेंगे ज्वाइन; प्रशासनिक कामकाज को मिलेगी रफ्तार बिहार को जल्द मिलेंगे 25 नए IAS अधिकारी, इस दिन करेंगे ज्वाइन; प्रशासनिक कामकाज को मिलेगी रफ्तार गोपालगंज पुलिस ने पशु तस्कर गिरोह का किया भंडाफोड़, सात गिरफ्तार Bihar Board Matric Result 2026: आंगनबाड़ी सेविका और किसान का बेटा बना स्टेट टॉपर, मैट्रिक परीक्षा में 8वां रैंक किया हासिल पनोरमा स्टार 2026 : बॉलीवुड एक्टर चंकी पांडेय ने बांधा समा, कलाकारों के साथ झूमा छातापुर
17-May-2021 08:51 PM
PATNA : बिहार में भले ही कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है. लेकिन राज्यवासियों के लिए ब्लैक फंगस एक नई मुसीबत के रूप में उभरा है. इन दिनों रोज ब्लैक फंगस के नए मरीजों की पहचान की जा रही है. हालात ये हैं कि पटना के विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस की चपेट में आस चुके 4 दर्जन से ज्यादा मरीज भर्ती हैं.
पटना में लगातार ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजों की पहचान की जा रही है. ऐसे मरीजों की तादाद बढ़ती ही जा रही है. जानकारी मिली है कि राजधानी पटना के विभिन्न बड़े अस्पतालों में 50 से ज्यादा मरीजों को भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के साथ-साथ डायबिटीज के मरीजों के लिए यह जानलेवा साबित हो रहा है.
राजधानी पटना के पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एम्स के साथ निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस से पीड़ित 50 से ज्यादा मरीजों को भर्ती किया गया है. बताया जा रहा है कि आईजीआईएमएस में 20, एम्स में लगभग 16 और पीएमसीएच में 7 मरीजों के अलावा रूबन, पारस और बिग हॉस्पीटल में भी इस बीमारी से संक्रमित कई मरीज भर्ती हैं.
पीएमसीएच के ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनीत सिन्हा ने बताया कि यह विशेष प्रकार का फंगल इंफेक्शन है जो व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होता है. एम्स पटना के न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास झा ने बताया कि यह बीमारी तब खतरनाक रूप ले लेती है, जब यह नाक के रास्ते दिमाग में प्रवेश करती है. उस समय यह काफी जानलेवा हो जाती है और 95 प्रतिशत केस में मरीजों के बचने की संभावना नहीं रहती है.
उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी और दवाइयों का इस्तेमाल ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर विकल्प है. यह संक्रमण नाक, आंख, दिमाग, फेफड़े अथवा चमड़े पर भी हो सकता है. इससे आंखों की रौशनी जा सकती है तो कुछ मरीजों के नाक और जबड़े की हड्डियां गल जाती है और दांत टूटने लगती हैं.