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Om Birla: अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे ओम बिरला, सदन में भी नहीं जाने का लिया फैसला

Om Birla: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक वे न तो सदन में प्रवेश करेंगे और न ही अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे।

Om Birla
ओम बिरला का बड़ा फैसला
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Om Birla: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वे न तो सदन के अंदर प्रवेश करेंगे और न ही अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे। हालांकि इस तरह का कोई संवैधानिक या संसदीय नियम नहीं है, इसके बावजूद बिरला ने यह कदम उठाने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि सरकार या विपक्ष की ओर से मनाने की कोशिश होने पर भी वे अपने फैसले पर अडिग रहेंगे।


इससे पहले ओम बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया था कि उन्हें पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस की जांच की जाए और नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। विपक्ष ने मंगलवार को यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा था, जिसमें बिरला पर सदन को पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे आरोप लगाने और अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।


दरअसल, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने सहित कई मुद्दों को लेकर विपक्ष नाराज है। इसी पृष्ठभूमि में विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस सौंपा। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस पर नियमों के तहत विचार किया जाएगा।


यह नोटिस लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश, सांसद मोहम्मद जावेद और अन्य सदस्यों द्वारा सौंपा गया। इस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके सहित कई विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर हैं, हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। गौरव गोगोई ने बताया कि यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है।


गौरतलब है कि 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके अलावा सदन की अवमानना के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन सहित अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में लगातार गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को खुलकर बोलने की छूट दी जा रही है। 

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता