Bihar Transport News: परिवहन विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा, MVI ने फर्जी पेपर पर 45 वाहनों का A/P निर्गत किया...अधिकारी ने निबंधित किया

Bihar Transport News: पूर्णिया परिवहन कार्यालय में बड़ा घोटाला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे राज्यों के 45 वाहनों का बिहार में निबंधन किया गया। रिटायर्ड अधिकारी मनोज कुमार शाही पर गंभीर आरोप,

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Tue, 10 Feb 2026 05:29:10 PM IST

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Bihar Transport News: परिवहन विभाग में बड़े खेल का खुलासा हुआ है. फर्जी तरीके से दूसरे राज्य के वाहनों को बिहार में निबंधन करने का मामला सामने आया है. प्रमंडलीय आयुक्त सह अध्यक्ष क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार की जांच रिपोर्ट के आधार पर परिवहन विभाग ने तत्कालीन अधिकारी के खिलाफ सरकार से शिकायत की. हालांकि जिस अधिकारी पर फर्जी तरीके से दूसरे राज्य की गाड़ियों को बिहार में निबंधन करने का आरोप हैं, वे 2019 में ही सेवानिवृत हो चुके हैं. ऐसे में सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि यदि परिवहन विभाग को लगता है कि आरोप गंभीर हैं या गंभीर वित्तीय क्षति का मामला है, तो इसे अन्य नियमों के तहत आप कार्रवाई कर सकते हैं .

तत्कालीन अधिकारी पर गंभीर आरोप

यह मामला पूर्णिया परिवहन कार्यालय से जुड़ा है . पूर्णिया के तत्कालीन पदाधिकारी मनोज कुमार शाही पर गंभीर आरोप हैं. परिवहन विभाग ने 20 जनवरी 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग को रिपोर्ट किया था. जिसमें कहा गया था कि BULK LPG टेंडर पाने के मकसद से फर्जी दस्तावेज के आधार पर पता में परिवर्तन किया गया. इसके बाद दूसरे राज्यों के टैंक ट्रक का बिहार में गलत तरीके से निबंधन किया गया. इस आलोक में कोर्ट ने 26 जून 2025 को आदेश पारित किया है.

45 गाड़ियों का फर्जी तरीके से A/P निर्गत किया गया 

इस आलोक में ट्रांसपोर्टर संगठन की शिकायत पर प्रमंडलीय आयुक्त पूर्णिया से जांच प्रतिवेदन आया. जिला परिवहन पदाधिकारी पूर्णिया द्वारा रिपोर्ट किया गया है की मोटर यान निरीक्षक पूर्णिया द्वारा स्थापित नियमों के खिलाफ 45 वाहनों का A/P निर्गत किया गया. इसके बाद मनोज कुमार शाही ने उन वाहनों का निबंधन किया.

आपको लगता है तो एक्शन लें....

परिवहन विभाग के आरोप, जांच रिपोर्ट की सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर पर समीक्षा की गई। जिसमें पाया गया कि तत्कालीन अधिकारी मनोज कुमार शाही नवंबर 2018 में ही सेवानिवृत हो गए हैं. इसके बाद उन्होंने सेवांत लाभ ले लिया है. यह आरोप वर्ष 2018 या इसके पहले के हैं. ऐसे में काल बाधित होने की वजह से आरोपों को पेंशन नियमावली में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है . लिहाजा आरोपों को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया. हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि परिवहन विभाग को अगर लगता है कि मामला गंभीर है तो अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकते हैं.