रोहिणी ने भाषा की मर्यादा पर NDA को दिया लंबा-चौड़ा ज्ञान, लालू के साथ फोटो शेयर कर दी ये चुनौती

रोहिणी ने भाषा की मर्यादा पर NDA को दिया लंबा-चौड़ा ज्ञान, लालू के साथ फोटो शेयर कर दी ये चुनौती

PATNA: बिहार में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अमर्यादित भाषा का खूब इस्तेमाल हो रहा है। पक्ष और विपक्ष के नेता एक दूसरे पर अरोप-प्रत्यारोप लगाने के दौरान भाषा की मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं। इसको लेकर बिहार में सियासत भी खूब हो रही है। लालू प्रसाद की बेटी और सारण से आरजेडी उम्मीदवार रोहिणी आचार्य ने अमर्यादित भाषा को लेकर फेसबुक पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है और विरोधियों पर जोरदार हमला बोला है।


रोहिणी ने फेसबुक पर लिखा कि, “महिलाओं-माँ-बहन-बेटियों को गाली देना, उन पर अमर्यादित टिप्पणी करना बहुत आसान है, विकृत मानसिकता वाले ऐसा अमूमन करते हैं, ऐसे लोग, ऐसी जमात से ताल्लुक रखने वाले पाखंडियों को जब एक औरत आईना दिखाती है तो इन्हें सांप सूंघ जाता है. यही स्थिति सारण के वर्तमान सांसद महोदय के साथ-साथ उनकी उस पूरी मंडली की भी है जिसकी ओछी राजनीति वो करते हैं, बजाए अपने काम पर वोट माँगे ये तमाम लोग एक औरत- एक बहन -एक बेटी - एक माँ को गाली देने, अपमानित करने में दिन-रात जुटे हैं”।


रोहिणी ने आगे लिखा कि, “टूरिस्ट बेटी .. विदेशी बेटी.. किडनी की एवज में टिकट लिया.. वगैरह ..वगैरह .. मैं पूछती हूँ बिहार के साथ - साथ देश की तमाम माँ - बहन - बेटियों व् हरेक विवेकशील इंसान से कि क्या ये एक बेटी का अपमान नहीं है ? क्या ये नारी अस्मिता पर चोट नहीं है ? मैं इन लोगों की तरह नहीं हूँ, अब मैं नहीं मेरा काम बोलेगा और मेरे लिए बिहार व् सारण का आवाम बोलेगा..अंत में एक बात और क्या हुआ मेरी उस चुनौती का जिसको स्वीकारने से ये लोग डर कर मौन हो गए ? 


उन्होंने लिखा कि, “क्यूँ नहीं स्वीकारते मेरी चुनौती और क्यूँ नहीं करवा लेते जाँच कि मेरे पिता को मैंने नहीं किसी और ने अपनी किडनी दी ? मैं जानती हूँ , मेरी चुनौती स्वीकारने का साहस उन लोगों में नहीं है, जो झूठ और फरेब के दम पर ही सियासत करते आए हैं और आज भी उसी झूठी - फरेबी परंपरा को बड़ी बेशर्मी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं. एक बेटी की चुनौती स्वीकार नहीं सकते , सच का सामना करने का साहस नहीं तो आओ मेरे पास मांग लो माफी, मैं माफ़ कर दूँगी, माता जानकी की भूमि बिहार की बेटी हूँ दया और क्षमा करने की प्रवृत्ति में व्यवहार व संस्कार में है”।