Bihar Bhumi: एक जमीन पर दो खतियान का खेल खत्म, सरकार ने सभी समाहर्ताओं से कहा– सरकारी भूमि पर मालिकाना हक का दावा करने वालों को 'स्वामित्व' का प्रमाण देना होगा..नोटिस जारी करने का आदेश

Bihar Bhumi News: बिहार में एक ही जमीन पर कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे के दो अधिकार अभिलेख को लेकर सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी जिलों के समाहर्ता को स्पष्ट निर्देश दिया है.

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Wed, 04 Feb 2026 12:44:54 PM IST

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Bihar Bhumi: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने 3 फरवरी को सभी जिलों के समाहर्ता को पत्र लिखा है. जिसमें एक ही भूमि पर दो अधिकार अभिलेख (कैडस्ट्रल सर्वे और रिविजनल सर्वे) पर स्थिति स्पष्ट किया है. सरकारी भूमि के लिए अगर दो अधिकार अभिलेख है तब समाहर्ता को क्या करना है, इस बारे में स्पष्टीकरण दिया गया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कहा है कि मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा में भी यह मुद्दा उठा है. साथ ही उपमुख्यमंत्री के जन कल्याण संवाद के दरभंगा प्रवास के दौरान जिलाधिकारी ने इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा था .

दरभंगा के जिलाधिकारी ने मांगा था मार्गदर्शन 

सरकारी भूमि का निजी व्यक्तियों के नाम पर अवैध हस्तांतरण रोकने को लेकर मुख्य सचिव ने 19 दिसंबर 2025 को दिशा निर्देश जारी किया था. दरभंगा के जिलाधिकारी ने विभाग से जो मार्गदर्शन मांगा, उसमें भी सरकारी भूमि के संबंध में दो अलग-अलग अभिलेख की व्याख्या करने को कहा था. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव ने सभी समाहर्ता (DM) से स्पष्ट किया है कि कैडस्ट्रल सर्वे 1890 से 1920 के बीच हुआ है. यह राज्य का पहला भूमि सर्वे था. जिसमें (सरकारी भूमि,सैरात,गैरमजरूआ) अंकित है. ऐसे में यह व्याख्या ही मूल व प्रारंभिक प्रति (कागजात) मानी जायेगी. 

साक्ष्य के साथ समाहर्ता के सामने प्रमाणित करना होगा

रिविजनल सर्वे में जहां मूल सर्वे की प्रविष्टि सरकारी भूमि अंकित हो, उसका नेचर तभी बदल सकता है जब, सरकार की शक्ति का प्रयोग करते हुए समाहर्ता उस भूमि का पट्टा किसी निजी व्यक्ति के नाम पर बंदोबस्त किया हो. साथ ही उसका प्रमाण राज्य सरकार के अभिलेख में उपलब्ध हो. सरकारी भूमि का रैयतीकरण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसे मानना अनिवार्य है. कोई भी निजी व्यक्ति किसी सरकारी भूमि पर मालिकाना हक का दावा करता है तो उसे स्वामित्व का हस्तांतरण साक्ष्य के साथ समाहर्ता के समक्ष प्रमाणित करना होगा. 

लैड सेटेलमेंट समाहर्ता ने किया हो ,तभी वो आपका होगा 

ऐसे में सभी समाहर्ता को निर्देश दिया जाता है कि सरकारी भूमि यदि रिविजनल सर्वे में निजी व्यक्ति के नाम से अंकित हो ,ऐसी स्थिति में भी वह सरकारी भूमि की श्रेणी में ही रहेगा, जब तक की समाहर्ता के आदेश से लैंड सेटेलमेंट नहीं किया गया हो .

भूमि पर 30 वर्ष या उससे अधिक समय से हो कब्जा फिर भी नोटिस जारी करें 

पूर्व में हुए किसी भी सर्वेक्षण जिसमें खतियान में अंतिम रूप से प्रकाशन हो चुका हो एवं भूमि की प्रकृति सरकारी भूमि है,  इस आधार पर उक्त भूमि को सरकारी भूमि मानू जायेगी. साथ ही उक्त भूमि का संरक्षण किया जाना है. सभी अंचल अधिकारियों को भी यह निर्देश दिया जाता है कि सरकारी भूमि पर यदि किसी का अनाधिकृत रूप से दखल कब्जा है, जो 30 वर्ष या उससे अधिक अवधि से है, फिर भी नोटिस निर्गत कर सरकारी भूमि का संरक्षण करें. जब तक की सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय का निर्णय लागू नहीं होता हो.