काउंटिंग से पहले EVM विवाद.. अखिलेश यादव ने धांधली का लगाया आरोप, चुनाव आयोग ने दी सफाई

काउंटिंग से पहले EVM विवाद.. अखिलेश यादव ने धांधली का लगाया आरोप, चुनाव आयोग ने दी सफाई

DESK: यूपी की सभी 403 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम कल यानी 10 मार्च 2022 को घोषित किए जाएंगे. लेकिन उससे पहले एक बार फिर EVM पर सवाल उठने लगा. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए बीजेपी को घेरा है. इस बीच चुनाव आयोग ने इस मसले पर सफाई दी है. दरअसल, बनारस में ईवीएम से लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई थीं. दो गाड़ियां निकल गईं, लेकिन एक को सपा के कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि चुनाव में धांधली की कोशिश की जा रही है.


अब इस पर चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा है कि वाराणसी में गाड़ी से बरामद की गई EVM मशीनें अधिकारियों के लिए मतगणना की ट्रेनिंग के मकसद से लाई गई थीं. चुनाव आयोग ने कहा कि इन मशीनों का मतदान में इस्तेमाल नहीं किया गया. आयोग ने पत्र जारी कर स्पष्टीकरण दिया है. चुनाव आयोग ने लिखा है कि वाराणसी में 8 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) गाड़ी में ले जाने का मामला संज्ञान में आया है. इस पर राजनीतिक प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है. जिला निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक EVM प्रशिक्षण के लिए लाई गईं थीं. 


मतगणना अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए जिले में 9 मार्च को प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है. इसके लिए ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) मंडी में स्थित अलग खाद्य गोदाम के स्टोरेज से प्रिशक्षण स्थल यूपी कॉलेज ले जायी जा रही थीं. 9 मार्च को काउंटिंग ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की दूसरी ट्रेनिंग में इसका इस्तेमाल किया जाना था. हैंड्स ऑन ट्रेनिंग के लिए हमेशा इन मशीनों का उपयोग किया जाता है. मशीनों के बारे में राजनीतिक दल जो भी कह रहे हैं, वह सिर्फ अफवाह है.


चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर सील बंद रखी हैं. ये मशीनें केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 3 लेयर सुरक्षा घेरे में सुरक्षित हैं. ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल की गईं मशीनों से इनका कोई लेना-देना नहीं है. स्ट्रॉन्ग रूम में रखी मशीनें CCTV की निगरानी में हैं. सभी राजनैतिक दलों के प्रत्याशी के प्रतिनिधी सीसीटीवी कवरेज के जरिए मशीनों पर लगातार 24 घंटे सातों दिन निगरानी कर रहे हैं. वाराणसी के जिला निर्वाचन अधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी यह जानकारी दी है.