1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sep 06, 2023, 7:55:34 AM
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PATNA : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार यह कहते रहते हैं ना हम किसी को बचाते हैं और ना ही हम किसी को फसातें हैं। अब इसका एक और नमूना कल देखने को मिला है जब भ्रष्टाचार के मामले में नीतीश कुमार ने बिहार के जेल डीआईजी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
दरअसल, नीतीश सरकार ने जेल डीआईजी शिवेंद्र प्रियदर्शी को पद से बर्खास्त कर दिया है। राजधानी पटना के बेउर जेल के पूर्व सुपरिटेंडेंट शिवेंद्र प्रियदर्शी की भ्रष्टाचार के एक मामले में नौकरी चली गई। गृह विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। विशेष सतर्कता इकाई (एसवीयू) ने 2017 में आय से अधिक संपत्ति मामले में शिवेंद्र प्रियदर्शी के ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसके बाद बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की सलाह के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया, क्योंकि उनके खिलाफ आरोप सही पाए गए। नीतीश कैबिनेट ने उनकी बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी है।
गृह विभाग द्वारा जारी सात पेज की अधिसूचना के अनुसार, एसवीयू ने 5 मई, 2017 को डीआइजी (जेल) शिवेंद्र प्रियदर्शी के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की और उनकी आय के ज्ञात स्रोत से ज्यादा संपत्ति और निवेश का पता लगाया। एसवीयू ने जब छापा मारा उसके अगले ही दिन शादी की सालगिरह थी। एसवीयू के अधिकारियों ने राजधानी पटना में लश काउंटी और वृंदावन अपार्टमेंट में स्थित उनके फ्लैटों पर छापेमारी की, जिसमें 1.2 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ। एफआईआर के अनुसार, शिवेंद्र और उनकी पत्नी रूबी प्रियदर्शी की अब तक की कुल आय 1.01 करोड़ रुपये थी, जबकि विभिन्न मदों में उनका खर्च 39.79 लाख रुपये था। इस प्रकार, उनकी संभावित बचत 61.47 लाख रुपये थी।
एसवीयू को भारतीय स्टेट बैंक में 14 लाख रुपये की सावधि जमा के अलावा 17 खातों की भी जानकारी मिली। अधिसूचना के अनुसार, डीआइजी (जेल) ने एलआईसी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और बजाज आलियांज जैसी बीमा पॉलिसियों में 30 लाख रुपये का निवेश किया। एसवीयू को 1.6 लाख रुपये नकद, एक लॉकर, 6 लाख रुपये के आभूषण, चार पहिया वाहन टाटा सफारी और स्विफ्ट डिजायर, जय प्रकाश नगर में एक घर (आधिकारिक निर्माण लागत 7 लाख रुपये) के अलावा फ्लैट नंबर भी मिला। आशियाना-दीघा रोड पर वृन्दावन अपार्टमेंट में 12.5 लाख रुपये मूल्य के 207 और फ्लैट नं. फ्रेंड्स कॉलोनी में लश काउंटी अपार्टमेंट में 105 की कीमत 20 लाख रुपये है।
आपको बताते चलें कि, झारखंड के हज़ारीबाग़ के निवासी शिवेंद्र प्रियदर्शी बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 14 जून, 1993 को जेल अधीक्षक के रूप में गृह विभाग में शामिल हुए और बाद में 2014 में उन्हें DIG के रूप में पदोन्नत किया गया। इससे पहले वह बेउर, सासाराम, सीवान और भागलपुर में तैनात थे।
एसवीयू द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी के अनुसार, प्रियदर्शी ने 2014 से वेतन के रूप में 68 लाख रुपये कमाए। उन्हें अपने वेतन का एक तिहाई हिस्सा बचाना चाहिए, लेकिन उन्होंने अपने और अपनी पत्नी रूबी प्रियदर्शी के नाम पर 1.2 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति अर्जित की। शिवेंद्र प्रियदर्शी जेल विभाग के दूसरे अधिकारी हैं जिनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया। इससे पहले 2014 में, निगरानी जांच ब्यूरो ने जेल विभाग के एक अधिकारी बीसीपी सिंह (पूर्व निदेशक, उद्योग) के परिसर पर छापा मारा था।