1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 15 Mar 2025 07:43:41 PM IST
Parents Teacher Meating - फ़ोटो Meta
Lifestyle : होली का रंग छूटा नहीं कि अब माता-पिता के लिए एक नई जंग शुरू हो रही है। पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) का मैदान। स्कूल की वो घंटी जो बच्चों को छुट्टी का सपना दिखाती है, तो वहीं मम्मी-पापा को लाडले की "हकीकत" जानने का मौका देती है। लेकिन सवाल यह है कि जब टीचर सामने हो, तो क्या पूछें कि मिनटों में पता चल जाए कि आपका नन्हा सितारा होनहार है या बस स्कूल की बेंच पर सपने बुनता है? चलिए, हम आपको पांच ऐसे धांसू सवाल बता देते हैं, जो टीचर की जुबान से सच उगलवा देंगे।
"मेरा लाडला पढ़ाई में कहां ठहरता है?"
यह सवाल आपको जानने में मदद करेगा कि आपका बच्चा गणित में स्टार है या हिंदी में "सीखने की जरूरत" का टैग उस पर लगा है, सब सामने आ जाएगा। अपने बच्चे की ताकत और कमजोरी का नक्शा यहीं से बनाएं।
"क्लास में यह शैतान कितना शरीफ है?"
क्या आपका बच्चा सवालों की बौछार करता है या चुपचाप खिड़की से बादल गिनता है? टीचर की एक नजर आपको बता देगी कि लाडले का कॉन्फिडेंस कितना बुलंद है या कितना दबा हुआ।
"स्कूल में इसका बर्ताव कैसा है?"
डेस्क पर ठुक-ठुक करता है या टीचर की बात मानकर सलीके से बैठता है? यह सवाल खोलेगा कि आपका बच्चा घर का "शेर" है या स्कूल का "सिपाही"। अनुशासन की असली रिपोर्ट कार्ड यहीं से मिलेगी।
"इसके दोस्त कौन-कौन हैं?"
दोस्त बनाते हैं बच्चे को, ये पुरानी कहावत सच है। टीचर से पता करें कि आपका लाडला किनके संग उछल-कूद करता है। होनहारों की टोली या शरारती शैतानों का दल। सोहबत ही भविष्य की नींव रखती है।
"कौन सा सब्जेक्ट इसके गले नहीं उतरता?"
हर बच्चे का कोई न कोई "दुश्मन सब्जेक्ट" होता है। टीचर की जुबान से जानें कि क्या साइंस इसके सिर के ऊपर से गुजरती है या इतिहास इसे नींद की गोली देता है। ट्यूशन का प्लान यहीं से शुरू करें।
सवालों का जादू
ये पांच तीर न सिर्फ आपके बच्चे की स्कूली जिंदगी का नक्शा खींच देंगे, बल्कि टीचर को भी एहसास दिलाएंगे कि आप कोई साधारण "हां-हूं" करने वाले माता-पिता नहीं हैं। मिनटों में पता चल जाएगा कि आपका लाडला क्लास का सितारा है या बस भीड़ का हिस्सा। इससे न सिर्फ उसकी पढ़ाई का हाल पता चलेगा, बल्कि उसकी शरारतों, सपनों और कमजोरियों का भी राज खुलेगा।
क्यों जरूरी है PTM?
हकीकत का आईना: यह मीटिंग वो दर्पण है, जिसमें बच्चे की स्कूली सच्चाई झलकती है।
टीचर से तार जुड़ते हैं: आप और टीचर एक टीम बन जाते हैं, जो बच्चे को ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
लाडले को लगाम: जब बच्चा देखता है कि मम्मी-पापा उसकी हर हरकत पर नजर रखते हैं, तो वह खुद-ब-खुद सीरियस हो जाता है।