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New Motor Vehicle Act: मोटर वाहन अधिनियम में बड़े बदलाव की तैयारी, बीमा और ड्राइविंग लाइसेंस के नियम होंगे सख्त

New Motor Vehicle Act: केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव की तैयारी कर रही है। बिना बीमा वाहन जब्ती, ड्राइविंग लाइसेंस नियम सख्त करने और चालान इतिहास के आधार पर बीमा प्रीमियम तय करने का प्रस्ताव है।

New Motor Vehicle Act
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

New Motor Vehicle Act: सड़कों पर बिना बीमा चलने वाले वाहनों और लापरवाह ड्राइविंग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसे वाहनों को जब्त करने का अधिकार देने, ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों को सख्त करने और ड्राइवर के व्यवहार को बीमा प्रीमियम से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किए हैं।


मंत्रालय ने राज्यों के परिवहन मंत्रियों और परिवहन आयुक्तों के साथ बैठक कर प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा साझा किया। प्रस्ताव के अनुसार, प्रवर्तन एजेंसियों को बिना वैध बीमा चल रहे वाहनों को हिरासत में लेने का अधिकार दिया जा सकता है। साथ ही जिन लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस पिछले तीन वर्षों में रद्द हो चुका है, उन्हें नया लाइसेंस जारी न करने का प्रावधान करने पर भी विचार किया जा रहा है।


मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 147 में संशोधन का भी प्रस्ताव रखा है, जिससे बीमा नियामक IRDAI को वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर बीमा प्रीमियम और देनदारी तय करने का अधिकार मिल सके। इसका उद्देश्य यह है कि बीमा की लागत ड्राइवर के व्यवहार से जुड़ी हो और बार-बार नियम तोड़ने वालों को अधिक प्रीमियम चुकाना पड़े।


एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चालान का रिकॉर्ड यह दर्शाने के लिए पर्याप्त होता है कि वाहन किस तरह चलाया जा रहा है। वर्तमान में थर्ड पार्टी बीमा के लिए आधार प्रीमियम और देनदारी सरकार तय करती है, वह भी IRDAI की सलाह से। इसके बावजूद, खासकर दोपहिया वाहनों में बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की है जिनके पास वैध बीमा नहीं है।


ड्राइवर के व्यवहार को लाइसेंस प्रणाली से जोड़ने के लिए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 9 में भी संशोधन का प्रस्ताव है, जो ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण से संबंधित है। इसके तहत असुरक्षित ड्राइविंग के चालान रिकॉर्ड वाले आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट से छूट नहीं दी जाएगी। अभी नियम के अनुसार लाइसेंस की समाप्ति से एक साल पहले नवीनीकरण कराने पर ड्राइविंग टेस्ट जरूरी नहीं होता।


हालांकि इन प्रस्तावों पर विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा का कहना है कि 15 साल की लाइसेंस वैधता अवधि में चालान होना सामान्य बात है और इससे व्यवस्था अत्यधिक व्यक्तिपरक हो सकती है। उनके अनुसार, हर नवीनीकरण से पहले ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य होना चाहिए और जिनका लाइसेंस रद्द हुआ है, उन पर पूरी तरह से नया लाइसेंस देने की रोक नहीं लगनी चाहिए, खासकर तब जब जांच में उनकी गलती साबित न हो।


इसके अलावा, मंत्रालय ने भारी और बड़े वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस की पात्रता में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अनुभव और कौशल के आधार पर चरणबद्ध तरीके से बड़े वाहनों का लाइसेंस देने की योजना है, ताकि सड़क सुरक्षा को और बेहतर किया जा सके।


सरकार थर्ड पार्टी बीमा के दायरे को बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव है कि निजी वाहनों में भी मालिक, ड्राइवर और वाहन में बैठे यात्रियों को बीमा सुरक्षा मिले। फिलहाल यह सुविधा केवल व्यावसायिक वाहनों तक सीमित है। वहीं ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की उम्र सीमा 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का भी प्रस्ताव है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता