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Success Story: पढ़ने से रोका तो UPSC क्रैक कर IAS बन गई बिहार की यह बेटी, चकनाचूर हो गया गांव के लोगों का घमंड

Success Story: राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में एक छोटे से गांव कुड़कुरी की रहने वाली प्रिया रानी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर बड़ा कारनामा कर दिखाया है.

Success Story
हौसलों को मिली उड़ान
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Success Story: कुछ कर गुजरने की चाह हो और मन में सच्ची लगन रहे तो मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं। आज देश ही नहीं पूरी दुनिया में बेटियां अपना लोहा मनवा रही हैं। समाज में अब भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो बेटियों को अधिक पढ़ाने पर सवाल उठाते हैं लेकिन बिहार की बेटी ने बंदिशों को तोड़कर ऐसा कारनामा कर दिया कि उसकी पढ़ाई का विरोध करने वाले लोग अब उसकी तारीफ करते नहीं थकते हैं।


दरअसल, राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में एक छोटे से गांव कुड़कुरी की रहने वाली प्रिया रानी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर वह कारनामा कर दिखाया जिसके लिए अच्छे-अच्छे तरसते हैं। पढ़ाई से रोके जाने और तमाम तरह की बंदिशें प्रिया की लगन के आगे फीकी पड़ गईं और तमाम बंदिशों को तोड़कर उसने यूपीएससी क्रैश किया और आईएएस अधिकारी बन गई।


प्रिया की बचपन की पढाई गांव में ही हुई। इस दौरान उसे गांव वालों का भारी विरोध भी सहना पड़ा। गांव के लोग इस बात से नाराज रहते थे कि परिवार वाले प्रिया को इतना अधिक क्यों पढ़ाते हैं। सभी तरह के विरोध के बावजूद प्रिया के दादा ने किसी की एक नहीं सुनी और पोती की पढाई के लिए सब से लड़ गए। विरोध के बीच दादा अपनी पोती प्रिया को पटना ले गए। प्रिया के पापा ने भी इसमें भरपूर सहयोग किया।


प्रिया ने पटना में किराए के कमरे में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की। बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग करने के बाद प्रिया को अच्छी जॉब मिल गई लेकिन उसमें सिविल सर्विस में जाने का जुनून था। इसके बाद उसने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। अपने दूसरी कोशिश में उसने इंडियन डिफेंस सर्विस में नौकरी हासिल की लेकिन उसका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था।


तीसरे अटेम्प्ट में वह सफल नहीं हो सकी लेकिन इसके बाद भी उसने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में उसने पूरे देश में 69वां रैंक हासिल किया और आखिरकार आईएएस अधिकारी बन गई। प्रिया का मानना है कि पढ़ाई जिंदगी की सबसे बड़ी संपत्ति है। कल तक जो गांव वाले उसकी पढ़ाई का विरोध करते थे आज वही लोग वाहवाही करते नहीं थकते हैं। आज प्रिया को देखकर गांव की अन्य लड़कियां भी परिवर्तन की राह पर चल पड़ी हैं।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता