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Success Story: पिता बस ड्राइवर, बेटे ने किया कमाल, कड़ी मेहनत कर बनें IAS अधिकारी; जानें सफलता की कहानी

Success Story: "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत"- यह कहावत आईएएस मोइन अहमद की कहानी में पूरी तरह सही साबित होती है। गरीबी और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने अपने आत्मविश्वास, लगन और मेहनत से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में...।

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Success Story: "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत"- यह कहावत आईएएस मोइन अहमद की कहानी में पूरी तरह सही साबित होती है। गरीबी और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने अपने आत्मविश्वास, लगन और मेहनत से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गए। मोइन अहमद के पिता हसन, मुरादाबाद में उत्तर प्रदेश रोडवेज बस चलाते थे। मोइन 5 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने बचपन में ही क्रिकेटर बनने के सपने को अलविदा कह दिया।


12वीं कक्षा पूरी करने के बाद मोइन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने का सोचा, लेकिन अधिक फीस और बैंक लोन की अनुपलब्धता के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इसके चलते उन्होंने मुरादाबाद से ही ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।


साइबर कैफे से शुरू हुई मेहनत

घर का खर्च और पढ़ाई दोनों संभालने के लिए मोइन ने मुरादाबाद में एक साइबर कैफे खोला। इस काम से उन्हें हर महीने करीब 40 हजार रुपये की आमदनी होती थी। इसके साथ ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी शुरू की। शुरुआती दौर में केवल उनकी मां ही उनके साथ थीं और परिवार के अन्य सदस्य इस फैसले से खुश नहीं थे।


2019 में मोइन ने कैफे बंद कर दिल्ली में यूपीएससी कोचिंग जॉइन की। तैयारी के लिए उन्होंने 2.5 लाख रुपये का लोन लिया। लगातार तीन अटेम्प्ट के बाद उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी 2022 में 296वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के बाद मोइन अहमद आईएएस अफसर बने और आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।


सफलता का संदेश

मोइन अहमद की कहानी यह सिखाती है कि आर्थिक कठिनाइयाँ और सीमित संसाधन किसी के सपनों को रोक नहीं सकते। सही सोच, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। उनकी यह यात्रा समाज के लिए एक मिसाल बन गई है कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

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