1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Sep 04, 2025, 1:46:24 PM
प्रतिकात्मक - फ़ोटो Google
Zomato Platform Charge Increase: तेज़ रफ्तार जीवनशैली में ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना अब लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। लोग अब रसोई में समय बिताने के बजाय मोबाइल ऐप्स के ज़रिए झटपट खाना मंगवाना पसंद करते हैं। इसी डिजिटल क्रांति में ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों की मांग भी तेजी से बढ़ी है।
भारत में इस क्षेत्र में जोमाटो (Zomato) एक प्रमुख नाम बन चुका है, जो देश के करोड़ों ग्राहकों को रोज़ाना सेवाएं दे रही है। बढ़ती मांग और बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों को देखते हुए जोमाटो ने अपने प्लेटफॉर्म चार्ज में 20% की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। पहले जहां ग्राहकों को 10 रुपये प्लेटफॉर्म फीस देनी होती थी, अब यह शुल्क बढ़ाकर 12 रुपये कर दिया गया है।
यह नई दरें सभी ऑर्डर पर लागू होंगी, चाहे ऑर्डर की कुल राशि कुछ भी हो। Zomato की प्लेटफॉर्म फीस में यह इज़ाफा नया नहीं है। इसकी शुरुआत 2023 में कंपनी के सीईओ दीपेन्द्र गोयल ने की थी, जब इसका उद्देश्य मुनाफा बढ़ाना था। तब यह फीस सिर्फ 2 रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 रुपये किया गया। फिर 1 जनवरी 2024 को यह 4 रुपये हुई, और साल के अंत में त्योहारों के दौरान इसे अस्थाई रूप से 9 रुपये कर दिया गया।
इसके बाद इसे स्थायी रूप से 10 रुपये कर दिया गया और इसे "फेस्टिव सीजन प्लेटफॉर्म फीस" कहा गया। अब, 2 सितंबर 2025 से यह बढ़कर 12 रुपये हो गई है। यानी दो साल में प्लेटफॉर्म फीस छह गुना बढ़ चुकी है। zomato का यह कदम उन्हें ग्राहकों को महंगा पड़ेगा लकिन तेज़ी से डिलीवरी होना ग्राहकों को आकर्षित करती है ।
ग्राहकों पर बढ़ेगा खर्च
अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को 2 रुपये ज्यादा देने होंगे, यानी पहले जहां 10 रुपये प्लेटफॉर्म फीस ली जाती थी, अब यह बढ़कर 12 रुपये हो गई है। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो महीने में कई बार खाना ऑर्डर करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक महीने में 20 बार ऑर्डर करता है, तो पहले उसे कुल 200 रुपये प्लेटफॉर्म फीस देनी होती थी, लेकिन अब यह बढ़कर 240 रुपये हो जाएगी।
जोमैटो की यह फीस पिछले दो वर्षों में कई बार बदली गई है। सबसे पहले इसे 2023 में लागू किया गया था, जब कंपनी के सीईओ दीपेन्द्र गोयल ने इसे मुनाफा बढ़ाने के मकसद से शुरू किया था। उस समय प्लेटफॉर्म फीस केवल 2 रुपये प्रति ऑर्डर थी। इसके बाद इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया, और अब 2025 में यह 12 रुपये तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे बढ़ती ऑपरेशनल लागत और त्योहारों के समय ऑर्डर की अधिक संख्या को वजह बताया जा रहा है। हालांकि यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन नियमित ऑर्डर करने वालों के लिए यह अतिरिक्त खर्च मायने रखता है।