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रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का नया कदम: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में धमाकेदार एंट्री

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, जो अनिल अंबानी की कंपनी है, अब अपनी ताकत रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में लगाने जा रही है। यह कदम कंपनी के पोर्टफोलियो को और भी मजबूती प्रदान करेगा और भारतीय ऊर्जा उद्योग में अपनी नई पहचान बनाएगा।

Reliance Infrastructure Anil Ambani
Reliance Infrastructure Anil Ambani
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रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर अब रिन्यूएबल एनर्जी इक्युपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से प्रवेश करने के लिए अपने प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है। इवान साहा को रिन्यूएबल एनर्जी इक्युपमेंट मैन्युफैक्चरिंग और मुश्ताक हुसैन को बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। साहा के पास 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है और वे पहले विक्रम सोलर और रीन्यू पावर जैसी कंपनियों में काम कर चुके हैं। वहीं, मुश्ताक हुसैन ने टेस्ला और रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमुख नेतृत्व भूमिकाएं निभाई हैं।

कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत में सोलर पैनल और कलपुर्जों के उत्पादन को बढ़ावा देना और स्वच्छ ऊर्जा में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इसके लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर एक एकीकृत सौर विनिर्माण इकाई स्थापित करेगी, जो भारतीय ऊर्जा उद्योग में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।

तिमाही नतीजों का असर

वहीं, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के तिमाही नतीजे भी चर्चा में रहे हैं। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी का घाटा बढ़कर 3,298.35 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले साल समान तिमाही में यह घाटा 421.17 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी की आमदनी में वृद्धि देखी गई है और यह तिमाही में बढ़कर 5129 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4717 करोड़ रुपये थी। कंपनी के खर्च में भी कमी आई है और यह घटकर 4,963.23 करोड़ रुपये हो गया है।

शेयर बाजार में उथल-पुथल

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयर में भी बवाल मचा हुआ है। मंगलवार को कंपनी के शेयर की खरीदारी तेज हो गई और यह 248.80 रुपये पर बंद हुआ, जो कि पिछले दिन के मुकाबले 1.70% की बढ़त दर्शाता है। ट्रेडिंग के दौरान यह शेयर 256.70 रुपये तक पहुंच गया, जबकि सितंबर 2024 में इसका उच्चतम स्तर 350.90 रुपये तक था। इस शेयर ने जून 2024 में 143.70 रुपये के निचले स्तर को भी देखा था, जिससे इसका 52 हफ्ते का हाई और लो काफी विविध रहा है।

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