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GST Council: अब महंगी पड़ेंगी ये चीजें! सरकार लगाने जा रही है भारी भरकम टैक्स, जानें... क्या होगा महंगा

GST Council: केंद्र सरकार कई समानों पर जीएसटी की दर 40% से ऊपर बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद न केवल राजस्व बढ़ाना है बल्कि इन उत्पादों की खपत को भी नियंत्रित करना है।

GST Council
जीएसटी की दर 40% से ऊपर बढ़ाने पर विचार
© GOOGLE
PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

GST Council: केंद्र सरकार लग्ज़री और 'सिन' उत्पादों जैसे तंबाकू, शराब, पान मसाला और महंगी गाड़ियाँ आदि पर जीएसटी की दर 40% से अधिक करने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का मानना है कि इन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाने से दो फायदे होंगे। एक तरफ सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी ओर इन उत्पादों की खपत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। 


फिलहाल जीएसटी व्यवस्था में 28% की अधिकतम टैक्स दर तय की गई है, जिसके ऊपर अधिकतम 22% का ‘सेस’ लगाया जा सकता है। लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद इन वस्तुओं पर कुल टैक्स 40% से भी अधिक हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने मंत्रियों के एक समूह (GoM) के समर्थन से कुछ विशेष श्रेणियों के लिए 40% की विशेष स्लैब का सुझाव दिया है। वहीं, पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्य इस सीमा को और अधिक बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। कई राज्यों का तर्क है कि 'सिन प्रोडक्ट्स' पर ऊंचे टैक्स लगाकर स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को नियंत्रित किया जा सकता है और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अधिक फंड जुटाया जा सकता है।


यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो शराब, तंबाकू उत्पाद, पान मसाला, महंगी गाड़ियाँ और बड़े घर जैसे उत्पाद आम उपभोक्ताओं के लिए और महंगे हो सकते हैं। हालांकि इससे सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं के लिए अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जो लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है। तीन और चार सितंबर को 


होगी जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। इस बैठक में न केवल लक्ज़री और सिन वस्तुओं पर टैक्स दर बढ़ाने पर विचार किया जाएगा, बल्कि जीएसटी स्लैब की मौजूदा संरचना को चार से घटाकर दो स्लैब में लाने के प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया जाएगा। सरकार का प्रस्ताव है कि 'मेरिट' कैटेगरी के उत्पादों और सेवाओं पर 5% और 'स्टैंडर्ड' कैटेगरी पर 18% टैक्स लगाया जाए।


इसके अलावा, बैठक में मुआवजा उपकर, स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर गठित मंत्रियों के समूह की सिफारिशों पर भी विचार किया जाएगा। बीते सप्ताह इन समूहों ने जीएसटी स्लैब में बदलाव के केंद्र के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी थी। अगर यह बदलाव मंजूरी पाता है, तो भारत की जीएसटी प्रणाली में यह एक बड़ा और ऐतिहासिक सुधार होगा, जो कर प्रणाली को और अधिक सरल, प्रभावी और राजस्व-सक्षम बना सकता है।