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फेसबुक और यूट्यूब पर रील देखकर टॉय ऑर्डर करना पड़ा महंगा, बच्चों की कार के नाम पर पटना के युवक से 11 हजार की ठगी

PATNA: सोशल मीडिया पर चल रही फेसबुक और यूट्यूब रील देखकर बच्चों की खेलने वाली कार (टॉय कार) ऑर्डर करना पटना के एक शख्स को महंगा पड़ गया। पीड़ित का कहना है कि सोशल मीडिया के म

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रील पर भरोसा करना पड़ा भारी
© social media
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: सोशल मीडिया पर चल रही फेसबुक और यूट्यूब रील देखकर बच्चों की खेलने वाली कार (टॉय कार) ऑर्डर करना पटना के एक शख्स  को महंगा पड़ गया। पीड़ित का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार कर रहे एक रील को देख वह झांसे में आ गया। 


राजस्थान की टॉय शॉप का करनामा

दिये गये मोबाइल नंबर पर जब संपर्क किया और बच्चों की कार का दाम पूछा तो कहा गया कि वो सस्ते दाम पर बच्चों का खिलौना घर तक पहुंचा देंगे। लेकिन बच्चों की कार और कुरियर के नाम पर कुल ₹11,000 की राशि ऑनलाइन वसूली गई, लेकिन इसके बावजूद न तो सामान भेजा गया और न ही पैसे वापस किए गए।  गोधा एजेंसी के नाम से फ्रॉड किया गया। 


ऑनलाइन  ऑर्डर के नाम पर ठगी 

पीड़ित के अनुसार, सबसे पहले बच्चों की खेलने वाली कार के नाम पर ₹3000 ऑनलाइन भुगतान कराया गया। इसके बाद कुरियर, डिलीवरी और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर ₹8000 और मंगवाए गए। भुगतान के बाद बार-बार डिलीवरी का भरोसा दिया गया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो टॉय कार मिली और न ही कोई वैध ट्रैकिंग डिटेल दी गई।


पीड़ित का आरोप

पीड़ित का कहना है कि संबंधित लोगों ने इनवॉइस, सोशल मीडिया प्रोफाइल और व्हाट्सऐप चैट दिखाकर भरोसा दिलाया। आरोप है कि विश्वास में लेने के लिए धार्मिक आस्था से जुड़ी बातें और कसम तक खाई गई, लेकिन बाद में कॉल और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया गया।


कानूनी पहलू

पीड़ित ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर साइबर सेल और स्थानीय थाना में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला ऑनलाइन ठगी और आईटी एक्ट के तहत दर्ज हो सकता है।


सतर्कता की अपील

पीड़ित ने आम जनता से अपील की है कि फेसबुक, यूट्यूब या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली रील्स और विज्ञापनों के झांसे में आकर बिना सत्यापन के भुगतान न करें, विशेषकर बच्चों के खिलौने या महंगे सामान खरीदते समय पूरी जानकारी ज़रूर जांचें।