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Bihar News: बिहार को मिला पहला नेशनल एक्सप्रेसवे, पटना से पूर्णिया अब सिर्फ 3 घंटे की दूरी

Bihar News: बिहार के पटना से पूर्णिया तक बनने वाला राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-9 (NE-9) राज्य की पहली पूरी तरह सीमांत एक्सप्रेसवे परियोजना है, जिससे यात्रा समय मात्र 3 घंटे रह जाएगा। इस परियोजना से बिहार की कई सुविधाएं मिलेंगी।

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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना से पूर्णिया के बीच बनने वाले 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को केंद्र सरकार ने अब राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा दे दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को नेशनल एक्सप्रेसवे-9 (NE-9) घोषित किया है। यह बिहार का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे होगा, जो पूरी तरह राज्य की सीमाओं के भीतर निर्मित किया जाएगा और इसे ‘गेमचेंजर प्रोजेक्ट’ के रूप में देखा जा रहा है।


इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद पटना से पूर्णिया की यात्रा महज 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी, जो फिलहाल 7 से 8 घंटे का समय लेती है। इसका उद्देश्य न केवल राजधानी से कोसी और सीमांचल क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी गति देना है।


इस प्रोजेक्ट को तीन चरणों (पैकेज) में बनाया जाएगा, और इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा। इस मॉडल के तहत निर्माण एजेंसी परियोजना लागत का 60% खर्च स्वयं वहन करेगी, जबकि शेष 40% राशि केंद्र सरकार प्रदान करेगी। निर्माण एजेंसी को भविष्य में टोल वसूली से लागत वसूलने का अधिकार मिलेगा और वह 15 वर्षों तक सड़क का रखरखाव भी करेगी।


यह एक्सप्रेसवे वैशाली जिले के मीरनगर (एनएच-22) से शुरू होकर समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया के हंसदाह (एनएच-27) पर समाप्त होगा। इसके साथ-साथ समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा के जिला मुख्यालयों से जोड़ने के लिए अलग संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे। वहीं, यह परियोजना बिहटा एयरपोर्ट से भी जुड़ जाएगी, जिससे इसकी रणनीतिक महत्ता और बढ़ जाएगी। दिघवाड़ा से शेरपुर के बीच प्रस्तावित गंगा पुल के जरिए इसकी कनेक्टिविटी जेपी सेतु और पटना रिंग रोड से भी सुनिश्चित की जाएगी।


बिहार सरकार की मंजूरी के बाद मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने इस परियोजना को हरी झंडी दी थी। अब राज्य सरकार ने केंद्र से अपील की है कि जल्द से जल्द इसकी निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि 2025 के आरंभ में निर्माण कार्य शुरू हो सके। यह परियोजना न केवल बिहार की लॉजिस्टिक क्षमता को सशक्त बनाएगी, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी को भी मजबूती प्रदान करेगी। व्यापार, पर्यटन और आवागमन के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिलेगा।