One Stop Centre : महिला पर किया हमला तो बचना होगा मुश्किल, तीन अंक वाले इस नंबर से सीधे मिलेगी मदद; चल जाएंगे जेल

राज्य सरकार ने पटना सहित पूरे बिहार में 26 नए वन स्टॉप सेंटर खोले हैं। ये हिंसा पीड़ित महिलाओं को तुरंत आश्रय, कानूनी और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराते हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 18 Feb 2026 03:30:52 PM IST

 One Stop Centre : महिला पर किया हमला तो बचना होगा मुश्किल, तीन अंक वाले इस नंबर से सीधे मिलेगी मदद; चल जाएंगे जेल

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One Stop Centre : बिहार सरकार महिलाओं को तुरंत और प्रभावी सहायता देने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर नेटवर्क का विस्तार कर रही है। समाज कल्याण विभाग के महिला एवं बाल विकास निगम के माध्यम से राज्यभर में 26 नए केंद्र बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में 39 केंद्र संचालित हैं, जो नए जोड़ने के बाद बढ़कर 65 हो जाएंगे। प्रत्येक जिले में एक-एक और पटना में दो केंद्र मौजूद हैं। प्रत्येक केंद्र में 13 प्रशिक्षित कर्मियों की टीम पीड़ित महिलाओं को आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, भोजन, कपड़े, मनो-सामाजिक और कानूनी परामर्श समेत अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करती है।


नए केंद्र जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर अनुमंडल मुख्यालयों पर स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों की महिलाएं भी सेवाओं का लाभ उठा सकें। पिछले तीन वर्षों में इन केंद्रों पर 23,585 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 20,000 से अधिक का समाधान किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 7,517 मामलों में 6,599 का निपटारा, 2024-25 में 8,888 मामलों में 7,185 का समाधान और 2025-26 जनवरी तक 7,180 मामलों में 6,322 का निपटारा किया गया।


पीड़ित महिलाएं वन स्टॉप सेंटर की हेल्पलाइन 181 पर संपर्क कर सकती हैं। त्वरित सहायता के लिए इन केंद्रों को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम 112 से जोड़ा गया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु कौशल प्रशिक्षण योजनाओं से भी केंद्रों को जोड़ा गया है।


वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिला हिंसा की शिकार पीड़ित को विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ता। समस्या का समाधान न होने पर संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय कर राहत प्रदान की जाती है। इसके बाद कम से कम छह माह तक पीड़िता की स्थिति पर निगरानी रखी जाती है। जिला स्तर पर इन केंद्रों की समीक्षा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला संचालन समिति द्वारा की जाती है, जिसमें जिला पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागीय अधिकारी शामिल होते हैं। महिला एवं बाल विकास निगम के स्तर पर भी साप्ताहिक समीक्षा की जाती है।