किसानों के लिए बड़ा फैसला: बिहार सरकार बनाएगी नया मार्केटिंग फेडरेशन, बिस्कोमान की तर्ज पर होगा विकसित

Bihar News: बिहार सरकार किसानों के लिए नया मार्केटिंग फेडरेशन बनाने जा रही है। यह फेडरेशन किसानों को बिचौलियों से मुक्त करेगा, फसल की सही कीमत दिलाएगा और राज्य के कृषि उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड के रूप में पहचान दिलाएगा।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Wed, 18 Feb 2026 02:57:51 PM IST

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नीतीश सरकार का बड़ा प्लान - फ़ोटो Google

Bihar News: बिहार के किसानों और पैक्स समितियों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद बिस्कोमान पर बिहार का सीधा नियंत्रण नहीं रह गया है। ऐसे में राज्य सरकार अब अपना ‘नया मार्केटिंग फेडरेशन’ स्थापित करने की तैयारी कर रही है।


यह प्रस्तावित फेडरेशन किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर सीधे बाजार से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही, बिहार के कृषि उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। सहकारिता विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिससे किसानों को खाद और उन्नत बीज के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा।


सरकार इस नए फेडरेशन को बिस्कोमान की तर्ज पर विकसित करना चाहती है। चूंकि बिस्कोमान अब बहुराज्यीय संस्था बन चुका है और उस पर राज्य सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है, इसलिए राज्य के भीतर मजबूत विपणन तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रमंडल स्तर पर सहकारी संघ गठित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण स्तर तक सशक्त नेटवर्क तैयार हो सके।


नए फेडरेशन के माध्यम से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कंपनियों या बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें बाजार भाव की सटीक जानकारी, भंडारण, पैकेजिंग और बिक्री की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खासतौर पर सीमांत किसानों को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, जो अक्सर मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेच देते हैं।


यह फेडरेशन केवल कृषि उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय पर उर्वरक और स्थानीय जलवायु के अनुरूप बीज भी उपलब्ध कराएगा। वर्तमान में खाद वितरण के दौरान लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया सुगम होने की संभावना है। इसके साथ ही, कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि बिहार की उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।


कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद ब्रांडिंग के अभाव में बिहार के उत्पादों को अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाती। राजधानी पटना स्थित सहकारिता विभाग इस योजना को जल्द लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। माना जा रहा है कि यह पहल राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।