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‘बिहार में शराबबंदी फेल, खुलेआम हो रही होम डिलीवरी’, जीतन राम मांझी ने फिर उठाए सवाल; सीएम नीतीश से की यह मांग

Bihar Politics: केंद्रीय मंत्री और गया सांसद जीतन राम मांझी ने बिहार में शराबबंदी कानून को फेल बताया और शराब की होम डिलीवरी पर चिंता जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कानून की समीक्षा की मांग की।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: केंद्रीय मंत्री और गया से सांसद जीतन राम मांझी बिहार में शराबबंदी पर हमेशा से सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर से शराबबंदी कानून को फेल बता दिया है और कहा है कि राज्य में शराब की होम डिलीवरी हो रही है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक के बाद अब मांझी ने भी शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग की है।


गया पहुंचे जीतन राम मांझी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि शराबबंदी से बिहार सरकार को काफी आर्थिक क्षति हो रही है। इसपर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सोंचना चाहिए। राज्य में शराबबंदी तो हो नहीं पा रही है और शराब की होम डिलीवरी हो रही है। बाहर से शराब बिहार पहुंच रही है। ऐसे में जनता का पैसा तो बाहर जा ही रहा है। इसपर सरकार को विचार करना चाहिए।


मांझी ने कहा कि शराबबंदी के कारण राज्य के जो गरीब तबके के लोग हैं किसी के बहकावे में आकर शराब बनाते हैं। शराब बनाने की जो प्रक्रिया है उससे इतर होकर बनाया जाता है। दो घंटे के भीतर जहरीली शराब बन जाती है। उन्होंने कहा कि नौसादर, यूरिया, गाय को दी जाने वाले इंजेक्शन मिलाकर विषैली शराब बनाई जाती है, जिसे गरीब तबके के लोग पीते हैं और जान गवांते हैं।


उन्होंने कहा कि बड़े लोग तो 10 हजार से लेकर 50 हजार तक की बोतल मगाकर पीते हैं। उनको कोई दिक्कत नहीं है, दिक्कत है तो हमारे राज्य के गरीब लोगों को। जो मेहनतकश हैं और किसी कारण से थोड़ा बहुत पी लेता है लेकिन उसे पता नहीं होता है कि वह शराब नहीं पी रहा है जबकि जहर पी रहा है। इसके कारण जीतने भी एससी जाति के लोग हैं, खासकर भुईयां-मुसहर इससे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।


जीतन राम मांझी ने कहा कि हमारे साथ काम करने वाला विषु मांझी जहरीली शराब पीने से पांच साल पहले दुनिया से चला गया। शराबबंदी कानून के तहत सबसे अधिक केस एससी के लोगों के खिलाफ हो रहे हैं। ऐसे में शराबबंदी की समीक्षा तो होनी ही चाहिए। 

रिपोर्ट- नितम राज, गयाजी

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