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Patna News: गंगा के उफान से पटना बेहाल, मरीन ड्राइव बना लोगों का आश्रय स्थल

Patna News: गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने पटना समेत आसपास के इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। विशेष रूप से बिंद टोली क्षेत्र टापू में तब्दील हो चुका है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Aug 08, 2025, 11:15:38 PM

Bihar Flood

बिहार में बाढ़ - फ़ोटो Google

Patna News: गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने पटना समेत आसपास के इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। विशेष रूप से बिंद टोली क्षेत्र टापू में तब्दील हो चुका है। यहां रहने वाले 500 से अधिक परिवार अब पानी से घिरे हुए हैं। बच्चों को स्कूल जाने के लिए ट्यूब और अस्थायी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जान जोखिम में है।


गंगा का पानी कई घरों में घुस चुका है, जिसके कारण लोग मरीन ड्राइव पर शरण लेने को मजबूर हैं। यहां खुले आसमान के नीचे तिरपाल और अस्थायी बांस के सहारे रैन बसेरा बनाना उनकी मजबूरी बन गई है। साथ ही, 9 किलोमीटर लंबा रिवरफ्रंट पैदल पथ पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे आवाजाही में और भी मुश्किलें आ रही हैं।


हालांकि जिला प्रशासन ने बिंद टोली और आसपास के प्रभावित इलाकों के लोगों के आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था की है। जेपी गंगा पथ पर बनाए गए राहत शिविरों में कुछ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन द्वारा चिकित्सा सुविधा, शुद्ध पेयजल और खाद्य सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लोगों का आरोप है कि राहत कार्य धीमी गति से हो रहे हैं।


गंगा नदी का उफान सिर्फ पटना तक ही सीमित नहीं है। मनेर में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यहां 12 पंचायतें पूरी तरह से पानी से घिर चुकी हैं। रतनटोला गांव में गंगा के कटाव की आशंका के कारण लोग पूरी रात जागकर अपनी जमीन और घर की सुरक्षा कर रहे हैं। कई लोग अपने मवेशियों को ऊँचे स्थानों पर ले जा चुके हैं।


मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटे तक गंगा के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। नेपाल के तराई क्षेत्र में भारी बारिश की वजह से बिहार में नदियों का दबाव बढ़ गया है। अगर बारिश की स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।


स्थानीय लोगों की मांग है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त नावें, मेडिकल टीम और मोबाइल टॉयलेट्स की व्यवस्था की जाए। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग राहत शिविर बनाने की आवश्यकता बताई जा रही है।